एचएम की कुर्सी को लेकर शिक्षक की हत्या, प्रधानाध्यापिका गिरफ्तार

इस घटना के बाद शिक्षकों और ग्रामीणों में भय का माहौल है। एक ओर शिक्षा के मंदिर में वर्चस्व की लड़ाई ने शिक्षक की जान ले ली तो दूसरी ओर यह घटना प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करती है

नालंदा दर्पण डेस्क। शिक्षा के मंदिर में विवाद और वर्चस्व की लड़ाई का दर्दनाक अंत उस समय देखने को मिला, जब प्राथमिक विद्यालय अनुसूचित जाति टोला गगरी में कार्यरत शिक्षक पिंटू रजक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मीरा कुमारी को गिरफ्तार कर लिया है, जो इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी हैं। दूसरे आरोपी शंकर सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार शेखपुरा जिला के गगरी गांव के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। शिक्षक पिंटू रजक और प्रधानाध्यापिका मीरा कुमारी के बीच घटना से एक दिन पहले भी तीखी बहस हुई थी। पिंटू रजक की पत्नी ने इस विवाद को उनके पति की हत्या का कारण बताया है और प्रधानाध्यापिका मीरा कुमारी तथा शंकर सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

दरअसल सुबह करीब 9 बजे शिक्षक पिंटू रजक बाइक से विद्यालय जा रहे थे, जब उन पर घात लगाकर हमला किया गया और गोली मार दी गई। घटना के बाद इलाके में भय और दहशत का माहौल है। हुसैनाबाद गांव के निवासी पिंटू रजक की हत्या ने शिक्षा विभाग और ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है।

वहीं पुलिस ने प्रधानाध्यापिका मीरा कुमारी को को ही हिरासत में ले लिया और 24 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस शंकर सिंह की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।

ग्रामीणों के अनुसार गगरी गांव के इस विद्यालय में प्रधानाध्यापिका पद को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई शिक्षक इस पद के लिए दावेदारी कर चुके हैं। पहले भी वरीयता के आधार पर नियुक्त प्रधानाध्यापक गौतम कुमार की संदेहास्पद सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अब पिंटू रजक की हत्या ने इस विवाद को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।

ग्रामीणों ने इस हत्याकांड को लेकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापिका पद को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने अब हिंसक रूप ले लिया है। इससे शिक्षा के माहौल को गहरा आघात पहुंचा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है और शिक्षा के इस पवित्र स्थान पर शांति और अनुशासन कैसे बहाल किया जाएगा।

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