
हिलसा (नालंदा दर्पण)। मगध विश्वविद्यालय से अलग होकर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के गठन के बाद भले ही पटना और नालंदा जिले के कॉलेजों को नई पहचान मिली हो, लेकिन हिलसा अनुमंडल के एकमात्र अंगीभूत इकाई, एसयू कॉलेज के हॉस्टल की स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है।
वर्ष 1955 में निर्मित यह हॉस्टल, जो कभी छात्रों के लिए आश्रय स्थल था, अब पूर्णतः खंडहर में तब्दील हो चुका है। सूर्य मंदिर तालाब के उत्तरी छोर पर वार्ड नंबर 16 में स्थित इस भवन की दीवारें और छतें जगह-जगह से ढह चुकी हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
यह हॉस्टल अब न तो रहने लायक बचा है और न ही सुरक्षित। खिड़कियां और दरवाजे गायब हैं और भवन की स्थिति इतनी खराब है कि यह कभी भी ढह सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह खंडहर अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। यहां नशा करने वालों का जमावड़ा रहता है।
आसपास के क्षेत्र में कोचिंग सेंटरों का हब होने के कारण सुबह के समय बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां से गुजरते हैं। इस दौरान मारपीट और छिनतई जैसी घटनाएं आम हो गई हैं, जो इस क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं।
हॉस्टल के आसपास बच्चे और युवा क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेल खेलते हैं और कई बार जर्जर भवन के पास ही बैठते हैं। बरसात के मौसम में यह भवन और भी खतरनाक हो सकता है। यदि प्रशासन ने समय रहते इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण पर ध्यान नहीं दिया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
स्थानीय निवासियों और छात्र नेताओं ने इस जर्जर हॉस्टल को तोड़कर नए भवन के निर्माण की मांग की है। उनका सुझाव है कि इस स्थान पर कॉलेज के किसी विभाग का भवन बनाया जाए, जिससे इसकी उपयोगिता बढ़े और खतरा टल जाए।
एसयू कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) गजेंद्र प्रसाद गदकर का कहना है कि इस समस्या से बिहार सरकार के शिक्षा विभाग और अन्य अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेजा गया है। जल्द ही इस भवन के भविष्य को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा। किसी जनप्रतिनिधियों द्वारा इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
छात्र नेताओं और स्थानीय लोगों ने नालंदा के जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि इस जर्जर भवन को तोड़कर नया भवन बनाने की योजना बनाई जाए, ताकि न केवल कॉलेज की सुविधाएं बढ़ें, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यह भवन न केवल कॉलेज के लिए, बल्कि पूरे हिलसा समुदाय के लिए एक चुनौती बन चुका है।





