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नालंदा के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को मिला नया पंख

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अभिवंचित लड़कियों को शिक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के लिए नालंदा जिले में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। जिले के सभी 20 केजीबीवी के विकास के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) ने 1 करोड़ 41 लाख 75 हजार रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि न केवल मांग से अधिक है, बल्कि इससे शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

बीईपी से 1 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन परिषद ने 41 लाख 75 हजार रुपये अतिरिक्त आवंटित किए। इस राशि से विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आइसीटी लैब और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी। साथ ही भवन निर्माण की कमी को दूर करने के लिए नए भवनों का निर्माण भी कराया जाएगा। इससे विद्यालयों की क्षमता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

केंद्र सरकार की सहमति के बाद शिक्षा विभाग ने देश के 534 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को प्लस टू स्तर तक अपग्रेड किया है। नालंदा जिले के 8 प्रखंडों के विद्यालयों को पहले ही 12वीं तक की पढ़ाई की अनुमति मिल चुकी थी। इनमें से एकंगरसराय, हिलसा, बिन्द और राजगीर प्रखंडों के विद्यालयों में इसी शैक्षणिक सत्र से प्लस टू की पढ़ाई शुरू होगी। नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालांकि इस्लामपुर, चंडी, गिरियक और हरनौत में भवन निर्माण के अभाव में अभी यह सुविधा शुरू नहीं हो सकेगी।

वर्तमान में प्रत्येक कस्तूरबा विद्यालय में 100 सीटें हैं। लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में चार अतिरिक्त कक्षाएं जोड़ी जाएंगी। साथ ही सभी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लासरूम और आइसीटी लैब स्थापित किए जाएंगे। वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से छात्राओं को कौशल विकास का अवसर भी मिलेगा, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

जिले के सभी कस्तूरबा विद्यालयों में एजेंसी के माध्यम से 3-3 कम्प्यूटर सेट लगाए गए हैं। बीईपी एक कम्प्यूटर सेट के लिए प्रति माह 850 रुपये का भुगतान कर रही है। इस तरह 60 कम्प्यूटर सेटों पर सालाना 6 लाख 12 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन एजेंसियों को कम्प्यूटरों की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, जिससे छात्राओं को निर्बाध डिजिटल शिक्षा मिल सके।

यह पहल नालंदा जिले की अभिवंचित लड़कियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के उन्नयन से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि छात्राओं को आधुनिक सुविधाओं और कौशल विकास के अवसर भी प्राप्त होंगे। भवन निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ ये विद्यालय लड़कियों के सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार बनेंगे।

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