बिहारशरीफः वायु प्रदूषण नियंत्रण ने बना रहा रिकार्ड, नगर निगम नाकाम

बिहारशरीफ नगर में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। नगर निगम के प्रयास अभी तक असफल साबित हुए हैं। इसे रोकने के लिए सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि नगर की हवा साफ और स्वस्थ हो सके

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहारशरीफ नगर की हवा का खराब होता स्तर नगरवासियों के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार नगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 11 दिसंबर से 16 दिसंबर तक के बीच AQI का न्यूनतम स्तर 159 और अधिकतम 167 दर्ज किया गया। जबकि रविवार को दोपहर 3 बजे यह 165 पर रहा।

इस नगर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर निगम प्रशासन ने वाटर स्प्रिंकलर मशीनों का सहारा लिया है। गढ़पर, अंबेर मोड़, भैंसासुर चौराहा, अस्पताल रोड, बड़ी पहाड़ी और सरकारी बस स्टैंड जैसी जगहों पर पानी का छिड़काव किया गया है।

इसके बावजूद एक्यूआई में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नगर में बढ़ता प्रदूषण मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से हो रहा है-

निर्माण कार्य: स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत पुलों और सड़कों के निर्माण से उड़ने वाली धूल।

वाहन प्रदूषण: बढ़ते वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआं।

पेड़ों की कमी: हरित क्षेत्रों की कमी के कारण हवा शुद्ध नहीं हो पाती।

गलत सफाई पद्धतियां: सुबह की सफाई के दौरान बिना पानी का इस्तेमाल किए झाड़ू लगाने से धूल हवा में फैलती है।

वायु में बढ़ते हानिकारक कण फेफड़ों और गले की बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद कण सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से खतरा पहुंच रहा है। खराब हवा के कारण खांसी, सांस लेने में तकलीफ और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

नगर की हवा को सुधारने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। सड़कों पर धूल नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव, निर्माण कार्यों को धूल मुक्त रखने के लिए उपाय और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण अभियान की आवश्यकता है। साथ ही जनजागरूकता बढ़ाने और वैकल्पिक परिवहन साधनों को प्रोत्साहित करने की भी जरूरत है।

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