Saturday, February 14, 2026
अन्य

    हिलसा अनुमंडलीय अस्पतालः डॉक्टर और परिजनों की नोकझोंक पहुंचा थाना

    हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में बीते 28 जुलाई को मरीज के इलाज को लेकर डॉक्टर और परिजनों के बीच हुई नोकझोंक का मामला अब तूल पकड़ रहा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर किया है, बल्कि निजी क्लिनिक और सरकारी अस्पतालों के बीच कथित सांठगांठ के गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज की है और परिजनों के पास मौजूद वीडियो फुटेज ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है।

    हिलसा थाना क्षेत्र के ढिबरापर गांव निवासी सुनीला देवी के 25 वर्षीय पुत्र आनंदी कुमार की 28 जुलाई की रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि आनंदी को उल्टी और दस्त की शिकायत थी। उसे तुरंत शहर के योगीपुर रोड स्थित एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया।

    वहाँ आधे घंटे के इलाज के बाद क्लिनिक संचालक ने मोटी रकम का बिल थमा दिया, जो परिजनों के लिए वहन करना मुश्किल था। जब परिजनों ने मरीज को अनुमंडलीय अस्पताल ले जाने की बात कही तो क्लिनिक संचालक ने कथित तौर पर धमकी दी कि कोई भी अस्पताल मरीज को भर्ती नहीं करेगा।

    किसी तरह परिजन मरीज को लेकर अनुमंडलीय अस्पताल पहुँचे। यहाँ पर्ची कटवाने के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर धर्मवीर कुमार से इलाज की गुहार लगाई गई।

    परिजनों का आरोप है कि तभी डॉक्टर के मोबाइल पर निजी क्लिनिक के संचालक का फोन आया। बातचीत के बाद डॉक्टर ने मरीज को देखे बिना दावा किया कि मरीज ने जहर खाया है और अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं है। उन्होंने परिजनों को मरीज को अपने निजी क्लिनिक में ले जाने का दबाव बनाया।

    परिजनों ने स्पष्ट किया कि मरीज ने जहर नहीं खाया, बल्कि उसे उल्टी और दस्त की समस्या है। निजी क्लिनिक ले जाने से इन्कार करने पर डॉक्टर आक्रोशित हो गए और बोले कि हम रिस्क नहीं ले सकते, यहाँ इलाज नहीं होगा।

    परिजनों ने इस दौरान घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। इससे नाराज़ डॉक्टर ने कथित तौर पर मोबाइल छीनकर फेंक दिया और गार्ड की मदद से परिजनों को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। बिना इलाज के परिजन मरीज को लेकर घर लौट गए। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है।

    ग्रामीणों का कहना है कि अनुमंडलीय अस्पताल में ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं हैं। कई बार मामूली बीमारियों के लिए भी मरीजों को निजी क्लिनिक रेफर कर दिया जाता है।

    घटना के अगले दिन डॉक्टर धर्मवीर कुमार ने परिजनों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए पाँच लोगों को नामजद और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

    दूसरी ओर मरीज की माँ सुनीला देवी ने भी थाने में आवेदन दिया। जिसमें डॉक्टर, एक जीएनएम, गार्ड और निजी क्लिनिक के संचालक पर इलाज में लापरवाही, निजी क्लिनिक में मरीज ले जाने का दबाव बनाने और गाली-गलौज का आरोप लगाया गया। परिजनों के पास मौजूद वीडियो फुटेज उनके दावों को बल दे रहा है।

    इस घटना के दौरान समाचार संकलन के लिए अस्पताल पहुँचे एक पत्रकार संतोष कुमार को भी डॉक्टर ने झूठे आरोपों में फँसा दिया। संतोष के अनुसार वह घटना की जानकारी मिलने पर समाचार संकलन के लिए गए थे। वहाँ डॉक्टर और परिजनों के बीच नोकझोंक चल रही थी। पूरी स्थिति समझने से पहले ही डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। बाद में उन्हें पता चला कि उनके खिलाफ भी प्राथमिकी में नाम शामिल किया गया है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडलीय अस्पताल में ऐसी घटनाएँ बार-बार होती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कई डॉक्टर निजी क्लिनिक चला रहे हैं और सरकारी अस्पताल में मरीजों को रेफर करने का चलन आम है।

    ग्रामीणों का आरोप है कि कमीशन के लालच में कर्मचारी सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को खराब बताकर मरीजों को निजी क्लिनिक ले जाने के लिए मजबूर करते हैं। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी-भरकम बजट खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बदतर बनी हुई है।

    हिलसा थानाध्यक्ष अभिजीत कुमार ने बताया कि डॉक्टर की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालाँकि परिजनों के आवेदन की जानकारी उन्हें नहीं होने की बात कही। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों की जाँच और वीडियो फुटेज की प्रामाणिकता की पड़ताल अभी बाकी है।

    बहरहाल यह घटना न केवल हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को भी उजागर करती है। क्या सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की जवाबदेही तय होगी? क्या निजी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच कथित सांठगांठ पर अंकुश लगेगा?

    Nalanda Darpanhttps://nalandadarpan.com/
    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    आपकी खबरें

    error: Content is protected !!