बिहार शिक्षा विभाग के ACS सिद्धार्थ का ताजा फरमान, अब बच्चों के रिजल्ट पर होगा शिक्षकों का मूल्यांकन

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। राज्य के सभी सरकारी प्राईमरी एवं मिडिल स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा आयोजित की जा रही है। शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा के लिए प्रत्येक स्कूल में वीक्षण का काम दूसरे स्कूलों के शिक्षकों द्वारा किया जायेगा। वहीं, उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन भी दूसरे स्कूल के शिक्षकों द्वारा कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि बच्चों के रिजल्ट पर शिक्षकों का मूल्यांकन हो सके।

बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी और सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना को दिशा-निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि निर्णय का उद्देश्य यह है कि सभी सरकारी प्राईमरी एवं मिडिल स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा का रिजल्ट यह दिखलायेगा कि किस स्कूल के शिक्षक द्वारा दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है।

शिक्षा और शिक्षण में होगा सुधार रिजल्ट शिक्षकों द्वारा किये जा रहे शिक्षण का मूल्यांकन का आधार उस स्कूल में पढ़ रहे छात्र- छात्राओं के परीक्षाफल पर निर्धारित करने के लिए शैक्षणिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन तैयार होगा। साथ ही मूल्यांकन रिपोर्ट शिक्षक के वार्षिक मूल्यांकन प्रतिवेदन में दर्ज करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किये जायेंगे।

पत्र में कहा गया है कि इस निर्णय के आलोक में सितंबर में सभी सरकारी प्राईमरी एवं मिडिल स्कूलों में आयोजित की जानेवाली अर्द्धवार्षिक परीक्षा का महत्व छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सभी शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि इस वर्ष के अर्द्धवार्षिक परीक्षा का सिलेबस परीक्षा के पूर्व समय पर पूर्ण करेंगे। यदि आवश्यक हो, तो इस कार्य के लिए संबंधित शिक्षक अतिरिक्त कक्षा का भी आयोजन कर सकेंगे, ताकि संबंधित स्कूल छात्र – छात्राओं इस अर्द्धवार्षिक परीक्षा में अच्छे अंकों से सफल हों।

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षा एवं शिक्षण की गुणवत्ता में बेहतर सुधार करना है। अब स्कूलों का निरीक्षण लिपिकीय संवर्ग के कर्मी या जेड़ नहीं करेंगे पटना। अब सरकारी स्कूलों का निरीक्षण लिपिकीय संवर्ग के कर्मी या कनीय अभियंता नहीं कर सकेंगे।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र भी भेजा है। पत्र में कहा है कि यह काम अब किसी विभाग के पर्यवेक्षकीय संवर्ग के पदाधिकारी ही ऐसा करेंगे। सभी जिला पदाधिकारियों, उपविकास आयुक्त को अपने जिला में पदस्थापित किसी भी विभाग के पर्यवेक्षक स्तर के अधिकारी को प्रतिनियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।

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