राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर रॉयल भूटानी मठ (लखांग) में पूजा-अर्चना कर बिहारवासियों की सुख-समृद्धि और राज्य के चहुंमुखी विकास की कामना की। यह मंदिर भारत-भूटान राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में भूटान सरकार द्वारा निर्मित न केवल आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक भी है।
सुबह शांत और पवित्र वातावरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर के इस भव्य मंदिर में प्रवेश किया, जहां उन्होंने बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। मंदिर के रंग-बिरंगे भित्ति चित्रों और शांतिपूर्ण वातावरण ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह मंदिर न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है, बल्कि बिहार और भूटान के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी उभरा है। राजगीर, जो बौद्ध और जैन धर्म का ऐतिहासिक केंद्र रहा है, अब इस मंदिर के साथ और अधिक गौरवशाली बन गया है।
रॉयल भूटानी मठ का निर्माण भूटान सरकार द्वारा भारत-भूटान के 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को स्मरण करने के लिए किया गया है। यह मंदिर बौद्ध धर्म के प्रचार और संरक्षण के साथ-साथ दोनों देशों के बीच मैत्री को मजबूत करने का प्रतीक है। मंदिर की वास्तुकला भूटानी शैली को दर्शाती है, जिसमें लकड़ी की नक्काशी, रंगीन भित्ति चित्र और बौद्ध प्रतीकों का समावेश है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर को एक वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता है। यह क्षेत्र न केवल बिहार की सांस्कृतिक धरोहर का गवाह है, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ प्रगति की नई कहानी भी लिख रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह दौरा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बिहार और भूटान के बीच संबंधों को और गहरा करने का संकेत भी देता है। भूटान के प्रधानमंत्री ने भी इस मंदिर के निर्माण के दौरान भारत के साथ सहयोग की सराहना की थी। यह मंदिर बिहार के पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक उदाहरण बन गया है।








