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Rajgir Nagar Parishad: नए कार्यपालक पदाधिकारी के सामने क्षमता से अधिक चुनौतियां

राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर नगर परिषद (Rajgir Nagar Parishad) के नये कार्यपालक पदाधिकारी सुनील कुमार द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद कार्यालीय काम किया जा रहा है। सुनील कुमार ऐसे समय में पदभार ग्रहण किये हैं, जब नगर परिषद में उथल पुथल का माहौल है। दो कर्मियों पर तीन बार प्राथमिकी दर्ज करने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। कुछ लोग अभी भी कार्रवाई की जद में हैं। अनियमितता में कनीय अभियंता कुमार आनन्द को बर्खास्त कर दिया गया है। सीटी मैनेजर का महीनों पहले स्थानांतरण हो गया है।

फिलहाल बिना सीटी मैनेजर और कनीय अभियंता का वित्तीय यह नगर परिषद है। नये कार्यपालक पदाधिकारी के समक्ष अनेकों चुनौतियां हैं, जिसका उन्हें सामना करना होगा। सबसे पहले लचर कार्यालयीय व्यवस्था को सुधारने और आंतरिक संसाधन को बढ़ाने की उनके सामने बड़ी चुनौती होगी।

नगर परिषद में होल्डिंग टैक्स का निर्धारण अबतक नहीं हुआ है। होटलों आदि को ट्रेड लाइसेंस निर्गत नहीं किया गया है। जुलाई महीना आखिरी पड़ाव पर है। अब तक अगले वर्ष के लिए बजट पारित नहीं हुआ है, नगर विकास के लिए बजट बनाना और पास कराना उनकी पहली चुनौती है।

दो साल से अवरुद्ध विकास कार्यों को पटरी पर लाना और योजनाओं को गुणवत्ता पूर्ण धरातल पर उतारने के साथ नगर परिषद क्षेत्र के प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना उनकी बड़ी चुनौती होगी। जिन आरोपों को लेकर कनीय अभियंता कुमार आनंद को बर्खास्त किया गया है। उनसे जुड़े योजनाओं के संबंधित ठेकेदारों से अपव्यय की राशि को वसूल करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

फुटपाथ दुकानदारों के लिए वेंडिंग जोन बनाना, पहले से चिन्हित वेंडिंग जोन में फुटपाथ दुकानदारों को पहुंचाना भी कार्यपालक पदाधिकारी के लिए चुनौती से कम नहीं होगी। सरकार द्वारा सिंगल यूज पॉलिथीन पर बैन लगा दिया गया है, लेकिन राजगीर में फुटपाथ दुकानदार से लेकर मिठाई दुकानदार, दवा दुकानदार, किराना दुकानदार, फल-सब्जी, मीट-मछली एवं अन्य प्रकार के दुकानदारों द्वारा प्रतिबंधित पॉलीथिन का इस्तेमाल बेखौफ किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए ईयो को चुनौती के रूप में लेना होगा।

राजगीर शहर अतिक्रमणकारियों के आक्रमण से कराह रहा है। सड़क हो अथवा पइन-पोखर सभी जगह अतिक्रमणकारियों का बोलबाला है। अतिक्रमण मुक्त शहर बनाने में कार्यपालक पदाधिकारी कितना सफल हो पाते हैं। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। नगर परिषद क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज के आसपास 25 एकड़ का गंगा सागर तालाब है। वह तालाब अब नक्शा के अलावा धरातल पर कहीं नहीं दिखता है। धरातल पर गंगा सागर तालाब को दिखाने के लिए भी उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।

इसके अलावा शहर में प्रतिबंधित पॉलिथीन के थोक बिक्रेताओं से भी उन्हें निपटने की चुनौती होगी। नगर परिषद के सभी प्रकार के भवनों की गणना नहीं होने के कारण होल्डिंग टैक्स का निर्धारण अब तक नहीं हुआ है। इस कारण नगर परिषद को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

नगर परिषद क्षेत्र के आवासीय और गैर आवासीय, सरकारी और गैर सरकारी भवनों का सर्वेक्षण कर होल्डिंग टैक्स कायम करना तथा राजस्व की वसूली करना भी चुनौती से कम नहीं होगी। अब तक शहर के किसी होटल को ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। नगर परिषद राजगीर की आधी से अधिक आबादी को गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। नगर की आधी से अधिक आबादी सीवरेज योजना के लाभ से वंचित हैं।

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