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राजगीर में अनाज घोटाला की गूंज: गोदाम की सहायक प्रबंधक और परिवहन अभिकर्ता पर FIR दर्ज

“ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग, थर्ड-पार्टी ऑडिट और स्थानीय स्तर पर सामाजिक निगरानी को और मजबूत करना जरूरी है…

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के सिलाव स्थित बिहार राज्य खाद्य निगम (BSFC) के टीपीडीएस गोदाम में खाद्यान वितरण को लेकर एक चौंकाने वाला अनाज घोटाला उजागर हुआ है। प्रथम दृष्टया यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि सुनियोजित हेराफेरी की ओर संकेत करता है, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर अंतर सामने आया है।

मामले में गोदाम की सहायक प्रबंधक ब्यूटी कुमारी और डोर स्टेप डिलीवरी (DSD) परिवहन अभिकर्ता शिवानी कुमारी के खिलाफ सिलाव थाना में कांड संख्या 85/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आरोप है कि करीब 100 क्विंटल (लगभग 200 बोरा) खाद्यान का फर्जी चालान काटकर उसे वितरण दिखा दिया गया, जबकि वास्तविकता में उक्त अनाज गोदाम से बाहर गया ही नहीं।

व्हाट्सएप वीडियो से खुला राजः इस पूरे मामले का खुलासा एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो क्लिप से हुआ। राजगीर अनुश्रवण समिति के एक सदस्य द्वारा साझा इस वीडियो ने प्रशासन को सतर्क कर दिया। वीडियो के आधार पर जिला प्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य निगम नालंदा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थलीय जांच कराई।

वीडियो में गोदाम पर तैनात 4जी डेटा एंट्री ऑपरेटर अजीत कुमार और मजदूरों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान मजदूरों ने साफ कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की लोडिंग नहीं की और न ही गोदाम से कोई अनाज बाहर गया।

ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाम जमीनी सच्चाईः जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि ऑनलाइन सिस्टम में मध्याह्न भोजन योजना के तहत एकता शक्ति फाउंडेशन सिलाव को खाद्यान भेजने की एंट्री दर्ज थी। 29 अप्रैल 2026 को वाहन संख्या BR 09 5084 के नाम से 100 क्विंटल खाद्यान का ट्रक चालान भी ऑनलाइन जनरेट किया गया था।

हालांकि, जिला प्रबंधक द्वारा की गई जीपीएस ट्रैकिंग और लोड सेल डेटा की जांच में पाया गया कि संबंधित वाहन खाली ही अपने गंतव्य एकता शक्ति फाउंडेशन पहुंचा था। इससे साफ जाहिर होता है कि कागजों पर आपूर्ति दिखाकर अनाज की हेराफेरी का प्रयास किया गया।

गोदाम सील, जांच तेजः मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सिलाव स्थित उक्त गोदाम को सील कर दिया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित सभी तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।

सरकारी वितरण प्रणाली पर उठे सवालः यह घटना सरकारी वितरण प्रणाली (TPDS) की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। तकनीकी संसाधनों, जैसे जीपीएस और डिजिटल एंट्री के बावजूद इस तरह की गड़बड़ी यह दर्शाती है कि सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप और मिलीभगत की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

सुधार की जरूरत क्यों? यह मामला केवल एक गोदाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि यदि निगरानी तंत्र समय पर सक्रिय न हो तो सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही कागजों में गायब हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग, थर्ड-पार्टी ऑडिट और स्थानीय स्तर पर सामाजिक निगरानी को और मजबूत करना जरूरी है।

फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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