प्रशासननालंदाफीचर्डबिग ब्रेकिंगभ्रष्टाचारराजगीर

नालंदा में खाली ट्रक-ऑनलाइन एंट्री का खेल! सिलाव TPDS गोदाम में घपला, FIR के आदेश

सिलाव टीपीडीएस (TPDS) गोदाम का यह मामला न केवल नालंदा, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है। यह दर्शाता है कि पारदर्शिता और जवाबदेही केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उनके ईमानदार क्रियान्वयन से आती है…

नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के सिलाव स्थित लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानि टीपीडीएस (TPDS) गोदाम से जुड़ा 10 हजार किलोग्राम (200 बोरा) खाद्यान्न का कथित ऑनलाइन निर्गत और वास्तविकता में शून्य उठाव का मामला अब केवल एक प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सार्वजनिक वितरण तंत्र, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और जमीनी स्तर की जवाबदेही पर गहरे सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है।

यह मामला जितना तकनीकी है, उतना ही संवेदनशील भी, क्योंकि इससे सीधे तौर पर मध्याह्न भोजन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना प्रभावित होती है, जो गरीब और जरूरतमंद बच्चों के पोषण से जुड़ी हुई है।

व्हाट्सएप वीडियो बना टर्निंग पॉइंटः पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 29 अप्रैल 2026 को उस समय हुई, जब अनुमंडलीय अनुश्रवण समिति राजगीर के व्हाट्सएप समूह में एक वीडियो वायरल हुआ। यह वीडियो किसी आम व्यक्ति द्वारा बनाया गया था, लेकिन इसकी सामग्री ने प्रशासनिक तंत्र की नींव तक हिला दी।

वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा था कि सिलाव टीपीडीएस गोदाम पर मौजूद 4G डाटा एंट्री ऑपरेटर अजीत कुमार और वहां काम कर रहे मजदूरों से पूछताछ की जा रही है।

वीडियो में मजदूरों ने साफ-साफ कहा कि उन्होंने किसी भी वाहन पर खाद्यान्न की लोडिंग नहीं की है और न ही गोदाम से कोई खाद्यान्न बाहर गया है।

वहीं 4G डाटा एंट्री ऑपरेटर अजीत कुमार ने भी यह स्पष्ट किया कि संबंधित ऑनलाइन एंट्री उनके द्वारा नहीं की गई है, बल्कि सहायक प्रबंधक द्वारा स्वयं की गई है। इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया।

डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक सच्चाई में टकरावः प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 29 अप्रैल 2026 को सुबह 11:22 बजे वाहन संख्या BR09R-5084 के माध्यम से 10 हजार किलोग्राम खाद्यान्न का ऑनलाइन चालान एकता शक्ति फाउंडेशन सिलाव के नाम पर जनरेट किया गया। यह वाहन लोडसेल और जीपीएस युक्त बताया गया, जो कि ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा है।

लेकिन जब वास्तविकता की जांच की गई तो पाया गया कि उक्त वाहन बिना खाद्यान्न के ही गंतव्य तक पहुंच गया। यानी सिस्टम में जहां 200 बोरा खाद्यान्न के निर्गत होने का रिकॉर्ड मौजूद था, वहीं जमीनी हकीकत में एक भी बोरा गोदाम से बाहर नहीं गया। यह विरोधाभास न केवल तकनीकी खामी, बल्कि संभावित सुनियोजित हेराफेरी की ओर इशारा करता है।

भूलवश एंट्री का तर्क क्यों कमजोर? सहायक प्रबंधक ब्यूटी कुमारी द्वारा इस पूरे मामले में भूलवश ऑनलाइन एंट्री की दलील दी गई। लेकिन जब तकनीकी प्रक्रिया को समझा गया तो यह तर्क स्वतः कमजोर पड़ता नजर आया। दरअसल, NIC पोर्टल पर किसी भी खाद्यान्न निर्गमन के लिए कई चरणों में मैनुअल प्रविष्टियां करनी होती हैं। जैसे वाहन का चयन, खाद्यान्न की मात्रा, बोरा संख्या, गंतव्य आदि।

ऐसी स्थिति में यह कहना कि इतनी जटिल प्रक्रिया गलती से पूरी हो गई, प्रशासनिक और तकनीकी दोनों दृष्टिकोण से असंगत प्रतीत होता है। यही कारण है कि जिला प्रबंधक ने इस तर्क को प्रथम दृष्टया अस्वीकार्य मानते हुए मामले को गंभीर अनियमितता की श्रेणी में रखा है।

गोदाम की स्थिति ने बढ़ाया संदेहः घटना की जानकारी मिलते ही राज्य खाद्य निगम जिला प्रबंधक  द्वारा 29 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे सिलाव टीपीडीएस गोदाम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गोदाम में 3233 बोरा चावल और 664 बोरा गेहूं भंडारित पाया गया। हालांकि कुछ मात्रा में खाद्यान्न फर्श पर बिखरा हुआ भी मिला, जो भंडारण प्रबंधन में लापरवाही का संकेत देता है।

यह स्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि कथित निर्गत खाद्यान्न वास्तव में गोदाम में ही मौजूद था, जिससे ऑनलाइन रिकॉर्ड की सत्यता पर गंभीर सवाल उठ खड़े होते हैं।

स्पष्टीकरण से बचाव या रणनीति? प्रशासन द्वारा 29 और 30 अप्रैल को क्रमशः ज्ञापांक 493 और शुद्धि पत्र 499 के माध्यम से सहायक प्रबंधक ब्यूटी कुमारी और डीएसडी परिवहन अभिकर्ता शिवानी कुमारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

इसके उलट सहायक प्रबंधक द्वारा 30 अप्रैल और 1 मई को सुबह 7:54 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से विशेष अवकाश का आवेदन भेजा गया। यह घटनाक्रम प्रशासनिक हलकों में संदेह को और गहरा करता है, क्योंकि जब एक गंभीर आरोप की जांच चल रही हो, उस समय स्पष्टीकरण देने के बजाय अवकाश लेना कई सवाल खड़े करता है।

गोदाम सील, FIR के आदेशः मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रबंधक ने 30 अप्रैल 2026 को सिलाव टीपीडीएस गोदाम को सील कर दिया। साथ ही अपर जिला प्रबंधक (टीपीडीएस) पिन्कु कुमार झा को निर्देश दिया गया कि सहायक प्रबंधक ब्यूटी कुमारी और डीएसडी परिवहन अभिकर्ता शिवानी कुमारी के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत सिलाव थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक सख्ती का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। अब इस प्रकरण की रिपोर्ट जिला पदाधिकारी और बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई है, जहां से आगे की कार्रवाई तय होगी।

क्या यह संगठित खाद्यान्न कालाबाजारी का संकेत? विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो यह मामला केवल एक फर्जी एंट्री तक सीमित नहीं दिखता। इसमें कई ऐसे तत्व हैं, जो संगठित स्तर पर खाद्यान्न कालाबाजारी की ओर संकेत करते हैं।

जैसे ऑनलाइन चालान का जनरेशन, जीपीएस युक्त वाहन का उपयोग, गंतव्य तक खाली वाहन का पहुंचना, मैनुअल एंट्री प्रक्रिया का दुरुपयोग, स्पष्टीकरण में देरी और अवकाश आवेदन। ये सभी बिंदु यह संकेत देते हैं कि यदि समय रहते यह मामला उजागर नहीं होता तो संभवतः खाद्यान्न का दुरुपयोग कर उसे बाजार में खपाने की योजना हो सकती थी।

डिजिटल निगरानी तंत्र पर सवालः सरकार द्वारा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस, लोडसेल और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किए गए हैं। लेकिन यह मामला दर्शाता है कि यदि इन सिस्टम्स का संचालन करने वाले ही ईमानदार न हों तो तकनीक भी बेअसर हो सकती है।

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल इंडिया के तहत लागू की गई व्यवस्थाएं तभी प्रभावी होंगी, जब उनके साथ मानव संसाधन की जवाबदेही और निगरानी भी मजबूत हो।

गरीबों के अधिकारों पर सीधा असरः मध्याह्न भोजन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी योजनाएं समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। ऐसे में यदि इन योजनाओं में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर गरीबों और बच्चों के पोषण पर पड़ता है।

इस मामले में यदि खाद्यान्न का दुरुपयोग होता तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की हानि होती, बल्कि उन बच्चों के अधिकारों का हनन भी होता, जिनके लिए यह योजना चलाई जा रही है।

अब आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सिलाव थाना में दर्ज होने वाली प्राथमिकी के बाद जांच किस दिशा में जाती है। क्या यह मामला केवल दो लोगों तक सीमित रहेगा या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क उजागर होगा? क्या डिजिटल सिस्टम में और खामियां सामने आएंगी? और सबसे महत्वपूर्ण कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी?

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.