Monday, February 16, 2026
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    बिहारशरीफ अस्पताल चौराहा तक यूं दिख रहा है शराबबंदी का हाल

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की सड़क पर खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आईं, जब नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के अत्यंत व्यस्तम इलाका अस्पताल चौक पर एक शराबी ने जमकर हंगामा किया। इस घटना ने राज्य में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    यहां एक व्यक्ति नशे में धुत होकर साइकिल से अस्पताल चौक पर पहुंचा और बीच सड़क पर लेट गया। उसकी इस अजीबोगरीब हरकत ने पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। कभी वह आती-जाती गाड़ियों के सामने लेट जाता तो कभी फिल्मी गानों की धुन पर झूमने लगता। स्थानीय लोग और राहगीर हैरान-परेशान होकर यह नजारा देखते रहे। जबकि चौराहे पर ट्रैफिक जाम लग गया।

    काफी देर बाद डायल 112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे व्यक्ति को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार हिरासत में लेते समय भी वह ‘तेरे इश्क में मैं जोगी हो गया’ जैसे गाने गा रहा था। व्यक्ति को तुरंत लहेरी थाने ले जाया गया।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब राज्य सरकार शराबबंदी के सख्त क्रियान्वयन का दावा कर रही है। बावजूद इसके इस तरह की घटनाएं कानून के अमल में हो रही खामियों को उजागर कर रही हैं।

    बिहार में शराबबंदी कानून के तहत शराब का सेवन, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। लेकिन इस घटना से स्पष्ट होता है कि कानून का पालन सख्ती से नहीं हो पा रहा है। जब शराबबंदी लागू है तो ऐसे शराबी तक किस तरह से शराब तक पहुंच रहे हैं।

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    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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