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भीड़ की क्रूरता का शिकार बना एंबुलेंसकर्मी, पत्नी की कोख में ही उजड़ा घर

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के गया जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली भीड़ की क्रूरता का एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। जहां एक एंबुलेंसकर्मी को भीड़ ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान नालंदा जिले के सिलाव थाना अंतर्गत एकसारी गांव निवासी कुंदन कुमार के रूप में हुई है। वे गया जिले के नीमचक बथानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन (इएमटी) के पद पर कार्यरत थे। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।

बताया जाता है कि गांव की एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए आशा कार्यकर्ता ने एंबुलेंस बुलाई थी। जब महिला को एंबुलेंस में बैठाया जा रहा था, तभी बैक करते समय एंबुलेंस गड्ढे में पलट गई। गाड़ी में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन यह छोटी-सी दुर्घटना देखते ही देखते भयानक रूप ले बैठी।

जैसे ही गांववालों को इस घटना की भनक लगी, वे मौके पर इकट्ठा हो गए। हालात को बिगड़ता देख एंबुलेंस चालक मुंद्रिका प्रसाद खेत की ओर भाग निकले। जबकि इएमटी कुंदन कुमार सड़क के रास्ते बच निकलने की कोशिश करने लगे। लेकिन क्रोधित भीड़ ने उन्हें घेर लिया और बेहरहमी से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही दूसरा एंबुलेंस और डायल 112 पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक कुंदन की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। उन्हें पहले राजगीर और फिर बिहारशरीफ के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दर्दनाक घटना की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

कुंदन कुमार बीते तीन वर्षों से नीमचक बथानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी शादी महज दो साल पहले हुई थी और उनकी पत्नी गर्भवती थीं। वह घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार आर्थिक संकट में घिर गया है, वहीं पत्नी का दर्द और भी गहरा हो गया है।

पुलिस ने इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की भीड़ हिंसा की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न दोहराई जाएं।

क्योंकि इस घटना ने न केवल एक परिवार को बर्बाद कर दिया, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक ऐसी हिंसक घटनाएं समाज को कलंकित करती रहेंगी?

Nalanda Darpan

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