बिहारशरीफ स्मार्ट सिटीः नारकीय बना रामचंद्रपुर बाजार समिति की हालत

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहारशरीफ नगर अवस्थित रामचंद्रपुर बाजार समिति की स्थिति दिन व दिन बद से बदतर होती जा रही है। महकती जलजमाव, सड़ांध मारती गंदगी और अव्यवस्था ने इस बाजार की पहचान को पूरी तरह बदल दिया है। यहां तक कि सावधानी से न चलें तो पैर फिसलने या चोट लगने का खतरा बना रहता है।

बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इस बाजार में करोड़ों रुपये खर्च कर नाला निर्माण, डीलक्स शौचालय, पेयजल सुविधा और एक चमकदार प्रशासनिक भवन बनाया गया है। लेकिन इन सभी सुविधाओं के बावजूद जलजमाव की समस्या जस की तस बनी हुई है।

केला मंडी हो या प्याज मंडी के पीछे का हिस्सा, पिछले तीन-चार महीनों से इन क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। पानी का निकास न होने के कारण पानी काला पड़ चुका है और उससे उठने वाली दुर्गंध इतनी तेज है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

यह दुर्गंध न केवल असहज करती है, बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा रही है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो गई है, जिसका सीधा असर व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ रहा है।

बाजार समिति में जल निकासी के लिए नाले तो बनाए गए हैं, लेकिन इन नालों को पुरानी नालियों से जोड़ा नहीं गया है। इस कारण पानी का निकास नहीं हो पा रहा। नतीजतन गंदा पानी सड़कों और गलियों में जमा हो रहा है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।

व्यापारियों का कहना है कि इस जलजमाव के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि कोई भी इस गंदगी और बदबू के बीच खरीदारी करने से कतराता है।

लंबे समय से जमा गंदा पानी मच्छरों और अन्य कीटाणुओं के पनपने का कारण बन रहा है। बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ गया है। इसके बावजूद, बाजार समिति में दवा का छिड़काव या सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं हैं, जिसके कारण स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

बिहारशरीफ को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शहर की तस्वीर बदलेगी। लेकिन रामचंद्रपुर बाजार समिति की मौजूदा स्थिति स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल उठाती है।

स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या पर ध्यान दे और बाजार समिति को स्वच्छ और सुगम बनाए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह बाजार न केवल व्यापार के लिए, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है।

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