बिहार शिक्षक मंच ने शिक्षक ट्रांसफर नीति पर उठाए गंभीर सवाल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षक मंच ने राज्य शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पोस्टिंग नीति पर कड़ा विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि यह नीति पुरुष शिक्षकों के साथ भेदभाव करती प्रतीत हो रही है। पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमावली में भारी असमानता है। जिससे शिक्षक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अध्यक्ष अमित कुमार का कहना है कि शिक्षा विभाग ने नियमावली में पुरुष शिक्षकों के लिए केवल अपने गृह अनुमंडल में पोस्टिंग की बाध्यता लगाई थी। लेकिन आवेदन करने के दौरान पाया गया कि गृह अनुमंडल के साथ-साथ अन्य अनुमंडलों की भी शर्तें जोड़ी जा रही हैं। जिनमें वाइफ का गृह अनुमंडल या उसका पोस्टेड अनुमंडल भी शामिल है। इतने अनुमंडलों की जानकारी देने की बाध्यता शिक्षक समुदाय के लिए अनुचित और पेचीदा साबित हो रही है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षकों के ट्रांसफर पोस्टिंग को आसान और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है। लेकिन यहां इसका उल्टा हो रहा है। इस प्रक्रिया के कारण कई शिक्षक मानसिक तनाव में आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग केवल गृह प्रखंड की बाध्यता लगाकर 10 प्रखंडों का विकल्प प्रदान करता तो यह बेहतर और व्यवहारिक समाधान होता।

उन्होंने ट्रांसफर पोस्टिंग सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियों पर भी सवाल उठाए। उदाहरण के तौर पर जम्मू-कश्मीर या दिल्ली के आवेदकों को उनके गृह राज्य का विकल्प ही नहीं दिखाई दे रहा है। इसके अलावा महिला शिक्षिकाओं के लिए नगर का विकल्प चुनने पर ब्लॉक या पंचायत का विकल्प गायब हो जा रहा है।

अमित कुमार ने कहा कि कई जगहों पर ट्रांसफर के दौरान गलत जानकारी भी सामने आ रही है। जैसे खगड़िया जिले में नगर निकाय के स्थान पर बेगूसराय का नाम दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि विभाग इन समस्याओं का समाधान नहीं करता तो शिक्षक न्यायालय का रुख करने को मजबूर होंगे।

बहरहाल, इस मुद्दे ने बिहार के शिक्षक समुदाय में असंतोष बढ़ा दिया है और आने वाले समय में शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध की लहर तेज होने की संभावना है।

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