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    Wednesday, July 17, 2024
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      E-Shikshakosh Portal: सरकारी स्कूलों में ई-शिक्षाकोष पोर्टल ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी

      नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। बिहार सरकार द्वारा ई-शिक्षाकोष पोर्टल (E-Shikshakosh Portal) की शुरूआत शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई है। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षकों और छात्रों के बीच डिजिटल माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना है।

      इस पोर्टल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि सभी शिक्षकों को एक ही मंच पर आवश्यक शैक्षणिक सामग्री, पाठ्यक्रम और अन्य शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच प्रदान की जाए। इसके अलावा ई-शिक्षाकोष पोर्टल के उपयोग से शिक्षकों की उपस्थिति, छात्रों की प्रगति रिपोर्ट और अन्य प्रशासनिक कार्यों का डिजिटल रिकार्ड भी रखा जाए।

      तकनीकी दृष्टिकोण से ई-शिक्षाकोष पोर्टल को उपयोग में आसान और सुगम बनाने के लिए विभिन्न नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया गया है। इस पोर्टल का उपयोग करने के लिए शिक्षकों और छात्रों को एक स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर की आवश्यकता होती है। जिसमें इंटरनेट कनेक्शन हो। इसके अतिरिक्त पोर्टल को मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में भी उपलब्ध कराया गया है। ताकि शिक्षकों और छात्रों को कहीं भी कभी भी इसका उपयोग करने में सुविधा हो।

      ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े। इसके अलावा इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का समावेश कर शिक्षकों और छात्रों के लिए एक समान अवसर प्रदान किया जा सके। इस पोर्टल का उपयोग कर शिक्षक अपनी शैक्षणिक सामग्री को अपडेट कर सकते हैं और छात्रों को नवीनतम जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

      शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न समस्याएं: बिहार में ई-शिक्षाकोष पोर्टल एप के प्रारंभ के बाद से, शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे पहली और प्रमुख समस्या तकनीकी कठिनाइयों के रूप में सामने आई है।

      पोर्टल का उपयोग करते समय शिक्षकों को अक्सर लॉगिन संबंधित समस्याएँ होती हैं। कई बार वे अपने सही क्रेडेंशियल्स का उपयोग करने के बावजूद भी पोर्टल में लॉगिन नहीं कर पाते हैं। यह समस्या शिक्षकों के लिए समय और ऊर्जा की बर्बादी का कारण बनती है।

      डेटा एंट्री में भी शिक्षकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पोर्टल पर डेटा एंट्री करते समय अनेक बार डेटा सही ढंग से सेव नहीं हो पाता है या फिर डेटा एंट्री के दौरान पोर्टल हैंग हो जाता है। इसके कारण पूरा डेटा पुनः एंटर करना पड़ता है, जो कि एक श्रमसाध्य और समय लेने वाला कार्य है।

      इसके अतिरिक्त ई-शिक्षाकोष पोर्टल का धीमा काम करना भी शिक्षकों की एक बड़ी समस्या है। पोर्टल के धीमे कार्य करने के कारण, शिक्षकों को अपने कार्यों को पूरा करने में अधिक समय और प्रयास लगाना पड़ता है। यह समस्या उन शिक्षकों के लिए विशेष रूप से गंभीर होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ इंटरनेट की गति पहले से ही कम होती है।

      इन समस्याओं के कारण शिक्षकों पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी बढ़ रहा है। लगातार तकनीकी समस्याओं और पोर्टल की असमर्थता के कारण शिक्षकों की कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह समस्या उनके शिक्षण कार्य और विद्यार्थियों के साथ संवाद में भी बाधा उत्पन्न कर रही है।

      शिक्षकों की प्रतिक्रियाएं और सुझावः ई-शिक्षाकोष पोर्टल एप के संबंध में बिहार के विभिन्न हिस्सों से शिक्षकों की प्रतिक्रियाएँ मिली हैं। कई शिक्षकों ने इस पोर्टल के माध्यम से अपनी कठिनाइयों और चिंताओं को साझा किया है।

      कुछ शिक्षकों का कहना है कि पोर्टल का उपयोग करना जटिल और समय-साध्य है, जिससे उनकी दैनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।

      एक शिक्षक ने बताया, ‘इस पोर्टल पर प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करना एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है। इंटरनेट की धीमी गति और पोर्टल के तकनीकी समस्याओं के कारण समय पर डेटा अपलोड करना संभव नहीं हो पाता।‘

      अन्य शिक्षक भी इस समस्या से सहमत हैं और उन्होंने सुझाव दिया है कि पोर्टल को अधिक उपयोगकर्ता-मित्रवत बनाना चाहिए। कुछ शिक्षकों ने यह भी सुझाव दिया कि पोर्टल के उपयोग के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि सभी शिक्षक इसे सही तरीके से उपयोग कर सकें।

      इसके अतिरिक्त कुछ शिक्षकों ने पोर्टल के मोबाइल एप्लिकेशन की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनके अनुसार यदि एक मोबाइल एप विकसित किया जाए तो इससे पोर्टल का उपयोग करना अधिक सहज और सुविधाजनक हो जाएगा।

      कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि पोर्टल में तकनीकी सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध होना चाहिए, जिससे वे अपनी समस्याओं का समाधान तुरंत पा सकें। उनकी अपेक्षा है कि इस पोर्टल को और भी अधिक उपयोगकर्ता-मित्रवत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए, ताकि यह उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में सहायक सिद्ध हो सके।

      शिक्षकों की प्रतिक्रिया और सुझाव पोर्टल के सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस फीडबैक के आधार पर सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि पोर्टल का उपयोग सभी के लिए आसान और प्रभावी हो सके।

      समाधान और भविष्य की योजनाएं: बिहार में ई-शिक्षाकोष पोर्टल को लेकर उत्पन्न समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार और संबंधित अधिकारियों ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। सबसे पहले पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है। इस टीम का मुख्य उद्देश्य पोर्टल की कार्यक्षमता और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाना है। तकनीकी सहायता के लिए एक हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है, जहाँ शिक्षक अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।

      शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे पोर्टल का सही और प्रभावी उपयोग कर सकें। इसके लिए राज्यभर में विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल के सभी फ़ंक्शंस और सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन वेबिनार और वीडियो ट्यूटोरियल्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि शिक्षक अपने समयानुसार इन्हें देख सकें और समझ सकें।

      भविष्य की योजनाओं में भी कई महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। पोर्टल को और अधिक इंटरैक्टिव और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही पोर्टल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीकों का समावेश करने की भी योजना है। ताकि शिक्षक और छात्र अपनी अध्ययन सामग्री को आसानी से ढूंढ सकें और उसका उपयोग कर सकें।

      सरकार का लक्ष्य है कि इस पोर्टल को एक समग्र शैक्षणिक संसाधन के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ शिक्षक और छात्र दोनों को ही उच्च गुणवत्ता की सामग्री और सुविधाएँ उपलब्ध हों। इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले समय में और भी सुधार देखने को मिल सकते हैं।

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