नालंदा में EOU-STF का बड़ा ऑपरेशन: भू-माफिया संतोष डॉन नेटवर्क पर ड्रोन निगरानी में चली घंटों छापेमारी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के भागनबीघा थाना क्षेत्र में शनिवार को आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त कार्रवाई ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। सुबह से शुरू हुई छापेमारी देर शाम तक जारी रही, जबकि सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर स्थानीय लोगों की नजरें टिकी रहीं।
सूत्रों के अनुसार खिदरचक गांव में कथित भू-माफिया संतोष डॉन और उसके करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। बताया जा रहा है कि जमीन कारोबार तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई। हालांकि देर शाम तक ईओयू अथवा एसटीएफ की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
ड्रोन से निगरानी, गांव बना सुरक्षा छावनीः छापेमारी को लेकर एजेंसियां पूरी तरह सतर्क दिखीं। पूरे अभियान के दौरान ड्रोन कैमरों की मदद से इलाके की निगरानी की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय बाद गांव में इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली।
दस्तावेजों की जांच, वाहन जब्तः कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक एक स्कॉर्पियो वाहन को भी जब्त किया गया है। बरामद सामग्री और दस्तावेजों की जांच के बाद ही एजेंसियां पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट कर पाएंगी।
राजनीतिक गलियारों में भी हलचलः छापेमारी के बीच जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी प्रवक्ता धनंजय देव ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति का नाम मामले में सामने आ रहा है, उसका वर्तमान में पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि जेडीयू भू-माफियाओं या किसी भी अवैध गतिविधि से जुड़े लोगों को संरक्षण देने की राजनीति नहीं करती।
हालांकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि आरोपी बताए जा रहे व्यक्तियों की विभिन्न राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
आधिकारिक खुलासे का इंतजारः फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एजेंसियों को छापेमारी के दौरान क्या-क्या महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
नालंदा में हुई इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई ने एक बार फिर जिले में भूमि कारोबार, आपराधिक नेटवर्क और राजनीतिक चर्चाओं को केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें ईओयू और एसटीएफ की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे प्रकरण की असली तस्वीर सामने ला सकती है।






