Friday, January 23, 2026
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    High court action on Nalanda DM: पटना HC ने नालंदा DM पर लगाया ₹5000 का जुर्माना, JDU नेता को DM देंगे जुर्माना

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। पटना हाई कोर्ट ने नालंदा डीएम पर ₹5000 जुर्माना लगाया है जुर्माना की राशि याचिकाकर्ता को देना है। वहीं जदयू नेता रिशु कुमार को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन पर नालंदा डीएम द्वारा लगाए गए सीसीए को निरस्त कर दिया है।

    साथ ही हाई कोर्ट ने अपने आदेश में नालंदा डीएम को आदेश दिया है कि पीड़ित रिशु कुमार को 5000₹ का भुगतान करें। क्योंकि नालंदा डीएम द्वारा न तो पीड़ित को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया गया और न ही Bसीसीए एक्ट के प्रावधानों का पालन किया गया।

    विदित हो कि मात्र 3 सनहा के आधार पर रिशु कुमार पर बिना उचित सुनवाई का अवसर दिए नालंदा डीएम द्वारा सीसीए लगा दिया गया था और जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित करायपरशुराय थाना में उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया गया था।

    उसे हाई कोर्ट ने गलत करार देते हुए नालंदा डीएम पर 5000 रुपया जुर्माना लगा दिया। इस बाबत पीड़ित रिशु कुमार से बात करने पर उनके द्वारा बताया गया कि डीएम द्वारा दुर्भावना से ग्रसित होकर उनके ऊपर बिना कोई अपराध के ही मात्र जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की वजह से सीसीए लगा दिया गया था, जिससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची।

    हाई कोर्ट के आदेश से पीड़ित बहुत खुश नजर आए और कहा कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। जनता का काम वे पूर्ववत करते रहेंगे।

    Mukesh Bhartiyhttps://nalandadarpan.com/
    वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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