
कतरीसराय (नालंदा दर्पण/संतोष भारती)। सरकार की महत्वाकांक्षी लोहिया स्वच्छता अभियान योजना कतरीसराय प्रखंड क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। स्वच्छ गांव और स्वच्छ बिहार का सपना यहां कागजों तक सीमित होकर रह गया है। स्वच्छता कर्मियों को न तो सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई है और न ही कचरा प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की समुचित व्यवस्था है। हालत यह है कि जर्जर हो चुकी गाड़ियों की मरम्मत कर्मियों को अपनी जेब से करानी पड़ रही है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्वच्छता अभियान से जुड़े कर्मियों ने बताया कि उन्हें पिछले 10 से 11 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। कम आय में परिवार का भरण-पोषण करने वाले कर्मियों के सामने अब आर्थिक संकट गहराने लगा है। कर्मियों का कहना है कि वर्ष 2024 में पूरे साल का मानदेय लंबित रहा, जबकि वर्ष 2025 के जून माह के बाद से मई 2026 तक भुगतान नहीं किया गया है।
मैराबरीठ पंचायत के स्वच्छता पर्यवेक्षक सोनू कुमार ने बताया कि सभी स्वच्छता कर्मी अक्टूबर 2022 से लगातार कार्यरत हैं, लेकिन चार वर्षों में केवल 18 माह का ही मानदेय मिला है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक लगातार आठ घंटे काम करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कई बार अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता।
वहीं स्वच्छता कर्मी रंजन कुमार, प्रवीण कुमार, संतोष कुमार, बबलू मांझी, मिंटू पंडित, धनेश्वर, बलू तांती, चुन्नू, राहुल, भोला, अकलेश, उदय और रंजीत पान तांती समेत अन्य कर्मियों ने बताया कि नियमित ड्यूटी के कारण वे दूसरा रोजगार भी नहीं कर पाते। ऐसे में लगातार मानदेय नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
इस पूरे मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि स्वच्छता कर्मियों के लंबित मानदेय की जानकारी उन्हें अब तक नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर जल्द समाधान का प्रयास किया जाएगा।
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