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गिरियक BDO पर सख्त कार्रवाई में जुटा विभाग, पूरे कार्यकाल की होगी जांच

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी मशीनरी अब पहले से अधिक आक्रामक और व्यवस्थित होती दिखाई दे रही है। नालंदा जिले के गिरियक प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ पवन कुमार ठाकुर के खिलाफ ग्रामीण विकास विभाग द्वारा शुरू की गई सख्त विभागीय कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राज्य सरकार की नई जीरो टॉलरेंस प्रशासनिक नीति का संकेत माना जा रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग की अपर सचिव मंजु प्रसाद द्वारा जारी आधिकारिक पत्र ने साफ कर दिया है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निगरानी विभाग की प्राथमिकी या ट्रैप केस ही कार्रवाई का आधार नहीं होगा। संबंधित अधिकारी के पूरे प्रशासनिक व्यवहार, निर्णय प्रक्रिया, फाइल संचालन, वित्तीय स्वीकृतियों और कार्य निष्पादन की भी गहराई से जांच होगी।

सूत्रों के अनुसार निगरानी थाना कांड संख्या 010/2026 दर्ज होने के बाद विभाग ने नालंदा के जिला पदाधिकारी को विस्तृत आरोप पत्र तैयार कर शीघ्र भेजने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि आरोप पत्र में सिर्फ रिश्वतखोरी से जुड़े आरोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनियमितता, पद के दुरुपयोग, कर्तव्यहीनता और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों को भी शामिल करने को कहा गया है।

ट्रैप से ट्रैक रिकॉर्ड तक की नई नीतिः अब तक आमतौर पर रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारियों के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद मामला लंबे समय तक विभागीय स्तर पर अटक जाता था। कई मामलों में अधिकारी निलंबित तो होते थे, लेकिन विभागीय जांच वर्षों तक पूरी नहीं हो पाती थी।

लेकिन इस बार सरकार ने जिस प्रकार का निर्देश जारी किया है, उससे संकेत मिल रहा है कि बिहार प्रशासन में अब ट्रैप से ट्रैक रिकॉर्ड तक की नीति लागू की जा रही है। यानी अधिकारी जिस काम में रिश्वत लेते पकड़ा गया, उस पूरी योजना फाइल भुगतान प्रक्रिया लाभुक चयन और सरकारी अभिलेखों की पुनः जांच होगी।

ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट कहा है कि प्री-ट्रैप और पोस्ट-ट्रैप मेमोरेंडम, सरकारी फाइलें, कार्यालय अभिलेख और अन्य दस्तावेज विभागीय जांच में साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जाएंगे। इससे जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह जाएगी, बल्कि कानूनी रूप से अधिक मजबूत मानी जा रही है।

आय से अधिक संपत्ति पर भी पैनी नजरः सरकार ने अपने निर्देश में यह भी साफ किया है कि यदि किसी अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का संदेह है तो उसकी वार्षिक संपत्ति विवरणी, जमीन-जायदाद, बैंक लेनदेन और संपत्ति खरीदने की अनुमति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच होगी।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन अधिकारियों के लिए बड़ा खतरे का संकेत है, जो वर्षों से विभिन्न योजनाओं में कमीशनखोरी और फर्जी भुगतान के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित करते रहे हैं।

ग्रामीण विकास योजनाओं पर उठते रहे हैं सवालः दरअसल बिहार के ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण और पंचायत स्तरीय विकास योजनाओं में भारी वित्तीय प्रवाह होता है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई जिलों से फर्जी भुगतान, कमीशनखोरी और लाभुक चयन में अनियमितता की शिकायतें सामने आती रही हैं।

नालंदा सहित कई जिलों में पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में गिरियक प्रखंड से जुड़ा यह मामला केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

डीएम और एसपी को भी जवाबदेही का संदेशः सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश में सभी विभागों के प्रधान सचिवों के साथ-साथ डीएम, एसपी और जांच एजेंसियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे यह स्पष्ट है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है तो इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पंचायत और प्रखंड स्तर पर फैले भ्रष्टाचार नेटवर्क पर भी असर पड़ सकता है।

क्या यह बनेगा मिसाल? गिरियक के तत्कालीन बीडीओ पर शुरू हुई कार्रवाई अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुकी है। आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह मामला भी पुराने मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा या फिर सरकार वास्तव में इसे एक मिसाल बनाकर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को मजबूत करेगी।

फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि बिहार सरकार ने अपने ताजा निर्देशों से यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि “पूरे सिस्टम की जवाबदेही” तय करने का दौर शुरू हो चुका है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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