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मदर्स डे पर माँ को मिला बड़ा तोहफा: डेढ़ माह बाद हिलसा में परिवार से मिली लापता वृद्धा

हिलसा (नालंदा दर्पण)। मदर्स डे के अवसर पर हिलसा नगर से मानवता, संवेदना और सामाजिक सरोकार की ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। लगभग डेढ़ माह से अपने परिवार से बिछड़ी एक वृद्ध महिला को समाजसेवियों और पत्रकारों की पहल से आखिरकार उसका परिवार मिल गया। जैसे ही महिला अपने पति और परिजनों से मिली, माहौल भावुक हो उठा और पूरे परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुआमा गांव की रहने वाली वृद्ध महिला मानसिक रूप से हल्की विक्षिप्त बताई जाती है। करीब डेढ़ माह पूर्व वह अचानक घर से लापता हो गई थी। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। इधर महिला भटकते-भटकते तीन दिन पहले हिलसा रेलवे स्टेशन पहुंच गई।

बताया जाता है कि रेलवे स्टेशन परिसर में वह लगातार तीन दिनों तक भूखी-प्यासी और असहाय अवस्था में रही। आने-जाने वाले लोग उसे देखते रहे, लेकिन किसी ने उसकी वास्तविक परेशानी समझने या मदद करने की गंभीर कोशिश नहीं की। महिला ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी, जिससे उसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा था।

इसी बीच शनिवार देर रात लगभग दस बजे हिलसा के वरिष्ठ पत्रकार प्रो. कमल किशोर प्रसाद और पत्रकार चंद्रकांत सिंह उर्फ झुनकू जी की नजर उस महिला पर पड़ी। दोनों ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए महिला से धैर्यपूर्वक बातचीत शुरू की। काफी देर तक समझाने और भरोसा दिलाने के बाद महिला ने अपने गांव और परिवार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी।

इसके बाद दोनों समाजसेवियों ने सिर्फ औपचारिकता निभाकर पीछा नहीं छुड़ाया, बल्कि एक बेटे की तरह जिम्मेदारी निभाई। महिला को अपने घर ले जाकर भोजन कराया, उसकी देखभाल की और सुरक्षित माहौल दिया। धीरे-धीरे महिला ने अपना पूरा पता और परिवार की जानकारी बताई।

इसके बाद स्थानीय स्तर पर संपर्क साधा गया और झारखंड पुलिस प्रशासन तक सूचना पहुंचाई गई। पलामू के एसपी की पहल पर महिला के पति और अन्य परिजनों से संपर्क स्थापित हुआ। रविवार की शाम महिला के परिजन हिलसा के जायसवाल मार्केट स्थित उषा उत्सव हॉल पहुंचे, जहां वृद्ध महिला को उन्हें सौंपा गया।

करीब डेढ़ माह बाद पत्नी को सामने देखकर पति की आंखों से आंसू छलक पड़े। परिजनों ने बताया कि महिला के लापता होने के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में था। हर दिन उसकी तलाश की जा रही थी और घर का माहौल मातम जैसा हो गया था। लेकिन मदर्स डे के दिन परिवार को उसकी वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं लगी।

वहीं वृद्ध महिला भी अपने परिवार को पाकर बेहद भावुक दिखी। चेहरे पर संतोष और सुरक्षा का भाव साफ नजर आ रहा था। इसके बाद परिजन उन्हें निजी वाहन से वापस झारखंड के पलामू लेकर रवाना हो गए।

मानवता का संदेश छोड़ गई यह घटनाः

यह घटना केवल एक लापता महिला के घर लौटने की कहानी भर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। आज के दौर में जहां लोग सड़क पर पड़े जरूरतमंदों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं हिलसा के समाजसेवियों और पत्रकारों ने साबित किया कि संवेदनाएं अभी जिंदा हैं।

मदर्स डे पर अक्सर लोग सोशल मीडिया पर मां के प्रति प्रेम का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन हिलसा में कुछ लोगों ने इसे वास्तविक जीवन में चरितार्थ कर दिखाया। एक असहाय वृद्ध महिला को उसके परिवार से मिलाकर उन्होंने यह साबित किया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।

स्थानीय लोगों के बीच भी इस पहल की खूब सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि हर शहर और हर समाज में ऐसे संवेदनशील लोग हों, तो कोई भी असहाय व्यक्ति खुद को अकेला महसूस नहीं करेगा।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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