नालंदा से बीकानेर तक फैला मानव तस्करी का जाल, दो नाबालिग बरामद, 4 गिरफ्तार
“नालंदा पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ कर कई जिंदगियां बचाई हैं। हालांकि यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभी लंबी लड़ाई बाकी है…
रहुई/बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के रहुई थाना क्षेत्र से अपहृत दो नाबालिग लड़कियों की राजस्थान के बीकानेर से सकुशल बरामदगी ने अंतरराज्यीय मानव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है।
पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक जुड़े पाए गए हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि मासूम बच्चियों को महज तीन लाख रुपये में ‘बेचने’ की साजिश रची गई थी।
घटना 19 अप्रैल की है, जब रहुई थाना क्षेत्र के बेसमक गांव से 14 वर्षीय किशोरी और उसकी 13 वर्षीय चचेरी बहन संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गईं। परिजनों द्वारा देर शाम तक घर नहीं लौटने पर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भारत सोनी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई शुरू की गई।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-2) के नेतृत्व में अंचल निरीक्षक नूरसराय की अगुवाई में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी अनुसंधान (टेक्निकल सर्विलांस) के आधार पर पुलिस को अहम सुराग मिला, जिससे पता चला कि दोनों लड़कियां राजस्थान के बीकानेर में हैं। इसके बाद पुलिस टीम को तत्काल बीकानेर रवाना किया गया।
राजस्थान के बीकानेर स्थित नया शहर थाना क्षेत्र से दोनों नाबालिगों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस दौरान पुलिस ने चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाना क्षेत्र के बिलोदा गांव निवासी राजेश कुमार उर्फ राजू (36 वर्ष) और उसकी पत्नी अंजली कुमारी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया।
जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने लड़कियों को झांसा देकर पहले बिहार से बाहर ले जाया और फिर उन्हें राजस्थान में बेचने की योजना बनाई थी। इस कड़ी में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के अमलाडीह गांव की एक अन्य नाबालिग लड़की को भी बरामद किया गया, जिसे पहले से ही बंधक बनाकर रखा गया था।
गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के बालचंद बिगहा निवासी धनवंती देवी उर्फ शोभा (30 वर्ष) और उसके सहयोगी मानपुर थाना क्षेत्र के प्रभुबिगहा निवासी पुरुषोत्तम कुमार को राजगीर के ब्रह्मकुंड के पास से गिरफ्तार किया गया। धनवंती देवी ने स्वीकार किया कि उसने दोनों नाबालिगों को तीन लाख रुपये में राजस्थान ले जाकर बेचने में सक्रिय भूमिका निभाई।
बरामद की गई तीसरी नाबालिग को उसके परिजनों को सूचित करते हुए बाल कल्याण समिति बिहारशरीफ के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास और इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में फैलते मानव तस्करी के खतरनाक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। सीमित जागरूकता, आर्थिक कमजोरी और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग के कारण ऐसे गिरोह आसानी से बच्चों और किशोरियों को निशाना बना रहे हैं।
पुलिस की त्वरित तकनीकी कार्रवाई और अंतरराज्यीय समन्वय इस केस में निर्णायक साबित हुआ, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए सामुदायिक सतर्कता, स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान और साइबर मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की जरूरत है।
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