नवादा-तिलैया रेल लाइन दोहरीकरण का काम पूरा, हाईस्पीड ट्रायल सफल

नवादा-तिलैया रेल लाइन के दोहरीकरण के पूरा होने के बाद किऊल-गया रेलखंड पर रेल यातायात और सुविधाओं में जबरदस्त सुधार होगा। सफल हाईस्पीड ट्रायल से स्पष्ट है कि अब इस सेक्शन पर तेज ट्रेनों का संचालन संभव होगा। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र के यात्रियों को सुगम और सुरक्षित रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा…

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नवादा-तिलैया रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य पूरा हो गया है, और अब इसका हाईस्पीड ट्रायल तथा संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा अंतिम निरीक्षण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने क्षेत्र के ग्रामीणों से ट्रैक पर न जाने की अपील की है। ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

दानापुर मंडल के अंतर्गत नवादा-तिलैया रेलखंड का दोहरीकरण परियोजना के तहत 124 किमी में से 107 किमी का काम पहले ही पूरा हो चुका था। अब शेष 17 किमी रेलखंड का अंतिम निरीक्षण एवं हाईस्पीड ट्रायल किया जा रहा है।

रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार पूर्वी परिमंडल के संरक्षा आयुक्त विशेष ट्रेन द्वारा इस नए दोहरीकृत रेलखंड का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके तहत ट्रैक की संरचनात्मक मजबूती, तकनीकी पहलुओं और सुरक्षा मानकों का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा।

इस रेलखंड पर एक सप्ताह पहले ही ट्रायल किया गया था। जिसमें नए ट्रैक पर 115 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल इंजन दौड़ाई गई। महज 15 मिनट में इस खंड की दूरी तय कर ली गई। जिससे यह पुष्टि हुई कि ट्रैक संचालन के लिए तैयार है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रायल पूरी तरह सफल रहा और अब 6 फरवरी तक नए ट्रैक पर नियमित ट्रेन परिचालन शुरू होने की संभावना है।

बता दें कि किऊल-गया रेलखंड के इस महत्वपूर्ण दोहरीकरण से ट्रेनों की गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यात्रियों के सफर में तेजी आने के साथ ही मालगाड़ियों के संचालन में भी सहूलियत होगी। इससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि रेलवे परिवहन की क्षमता में वृद्धि से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करें। विशेष रूप से समपार फाटकों को पार करते समय सतर्कता बरतें। बिना देखे रेलवे ट्रैक पार न करें और अपने मवेशियों को ट्रैक से दूर रखें। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने इन नियमों की अनदेखी की तो दुर्घटना की स्थिति में रेलवे प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।

दोहरीकरण कार्य पूरा होने के बाद रेलवे इस सेक्शन की तकनीकी सुविधाओं को अपडेट करने में जुटा है। प्री-एनआई और एनआई वर्क लगातार चल रहे हैं। ताकि ट्रेनों का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके। इसके तहत रेलवे क्रॉसिंग, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक के अन्य तकनीकी पहलुओं को उन्नत किया जा रहा है।

रेलवे द्वारा ट्रैक किनारे के गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि वे अनावश्यक रूप से ट्रैक पार न करें और न ही अपने पशुओं को रेलवे ट्रैक पर छोड़ें। जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर, पब्लिक अनाउंसमेंट और स्थानीय पंचायतों की मदद से सुरक्षा निर्देशों का प्रचार किया जा रहा है।

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