अब मनरेगा की पंचायत योजनाओं पर डिजिटल निगरानी से मचा हड़कंप

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। भारत सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में पारित योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। अब किसी भी योजना को पारित होने के तुरंत बाद उसके कार्य की फोटो, लाभार्थियों की सूची और ग्राम सभा की उपस्थिति विवरणी को अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यदि ये सूचनाएं निर्धारित समय में अपलोड नहीं की गईं, तो संबंधित योजना का आवंटन तत्काल रोक दिया जाएगा।

इस व्यवस्था का असर ज़मीनी स्तर पर पहले ही दिखने लगा है। नालंदा के अस्थावां प्रखंड से प्राप्त सूचना के अनुसार पोर्टल पर एक ही मजदूर की तस्वीर दो विभिन्न परियोजनाओं के तहत एक ही समय पर अपलोड होने का मामला सामने आया। इस विसंगति की सूचना सिस्टम ऑडिट में मिले डुप्लीकेट एंट्री से हुई और जांच में पाया गया कि इसमें पंचायत सेवक सहित कई कर्मियों की भूमिका संदिग्ध थी। अब प्रशासन ने सभी आरोपितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता के नए नियम सिर्फ मनरेगा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पंचायत स्तर की सभी योजनाओं पर लागू होंगे। ग्राम सभा को अधिक जिम्मेदारी दी गई है- अब ग्राम सभा द्वारा पांच लाख रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को सीधे अनुमोदित किया जा सकता है, जबकि इससे अधिक राशि की योजनाएं प्रखंड या जिला स्तर पर मंजूरी के लिए अग्रेषित की जाएंगी। ग्राम पंचायतों में अब जल संरक्षण, भूमि विकास, सूक्ष्म सिंचाई, ग्रामीण सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने जैसे कामों के प्रस्ताव ग्राम सभा में चर्चा के बाद पास होंगे।

मनरेगा के अंतर्गत निजी भूमि पर कार्य कराने का विकल्प भी विकेन्द्रीकृत कर दिया गया है, जिससे किसानों को फ़ायदा होगा। अनुसूचित जाति/जनजाति, बीपीएल परिवार, सीमांत एवं लघु किसान और ग्रामीण आवास योजना (पीएम आवास) के लाभार्थी निजी भूमि पर वर्मी कम्पोस्ट गड्ढा, खेत तालाब, मेडबंधी जैसे कार्य स्वीकृत करवा सकते हैं। इसके लिए पंचायत में आवेदन, जमीन का प्रमाण पत्र, सक्रिय जॉब कार्ड और ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में मनरेगा मजदूरी दर वर्तमान में 230 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रतिदिन तय है। जॉब कार्डधारियों को सालाना 100 दिन तक काम देने की गारंटी है। ग्राम सभा से पारित होने पर निजी भूमि पर स्वीकृत योजनाओं में अतिरिक्त 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का निर्माण लाभ भी मिलता है। इससे न केवल ग्रामीणों को रोजगार मिलता है, बल्कि उनकी भूमि में सुधार, जल प्रबंधन और आजीविका के स्थायी स्रोत विकसित होते हैं।

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