अब बिना स्पेशल ट्रेनिंग नहीं होगा शिक्षकों का प्रमोशन

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब बिहार में स्कूली शिक्षा की तरह विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों के लिए अब प्रोमोशन की राह में स्पेशल ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी गई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के पदाधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नयी शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत यह कदम उठाया गया है। ताकि शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण और बदलते दौर की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।

राज्य के शिक्षकों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। क्योंकि 50 फीसदी  से अधिक शिक्षक अभी तक नयी शिक्षा नीति से अपरिचित हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के करीब 3500 सहायक प्राध्यापक अब भी आवश्यक ट्रेनिंग लेने से वंचित हैं। जबकि केवल 3280 सहायक प्राध्यापकों ने ही अब तक ट्रेनिंग प्राप्त की है।

अब केंद्र सरकार ने साफ किया है कि यदि सहायक प्राध्यापक पदोन्नति पाना चाहते हैं तो उन्हें अनिवार्य रूप से चार मुख्य प्रकार के ट्रेनिंग कोर्स पूरे करने होंगे। प्रशिक्षण के तहत पहला आठ दिनों का न्यू एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) आधारित ओरिएंटेशन प्रोग्राम होगा। जिसमें शिक्षकों को नयी शिक्षा नीति के मुख्य सिद्धांत और उन्हें लागू करने की विधि सिखाई जाएगी।

इसके बाद छह दिनों का शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स और 24 दिनों का फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम होगा। सबसे महत्वपूर्ण रिफ्रेशर कोर्स है, जो 12 दिनों का होता है और इसका सीधा असर शिक्षकों की पदोन्नति पर पड़ता है। रिफ्रेशर कोर्स के बिना सहायक प्राध्यापक को एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर पद पर प्रमोशन नहीं मिल सकेगा।

बता दें कि बिहार में वर्षों से प्रशिक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी नियुक्ति के बाद से अब तक एक भी प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं किया है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता रहा है। केंद्र सरकार ने अब स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नव नियुक्त सभी सहायक प्राध्यापकों को अनिवार्य रूप से इंडक्शन ट्रेनिंग दिलायी जाए।

यह निर्णय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की गुणवत्ता और उनकी दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से लिया गया है। ताकि वे नयी शिक्षा नीति के अनुरूप अपने शिक्षण कार्य को और प्रभावी बना सकें।

इसके साथ ही शिक्षकों को प्रमोशन के लिए इस ट्रेनिंग को अनिवार्य करने से शिक्षकों के बीच अनुशासन और दक्षता का भी विकास होगा। राज्य उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों से समय पर ट्रेनिंग कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अपील की है। ताकि उनकी पदोन्नति प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

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