Friday, February 13, 2026
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    नालंदा जिला शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार और कोर्ट की अवहेलना का गंभीर आरोप

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष राजकुमार पासवान ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और उनके कार्यालय के विधि प्रभारी फनी मोहन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पासवान ने नालंदा जिला पदाधिकारी को एक पत्र लिखकर पटना उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना, शिक्षकों के बकाया वेतन में देरी और भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच की मांग की है।

    पासवान के अनुसार नालंदा जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान लगातार अनियमितताओं में लिप्त रहे हैं। इनमें मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति में नियमों का उल्लंघन, बेंच-डेस्क की खरीद में अनियमितता और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन में देरी जैसे मामले शामिल हैं। ये मुद्दे समय-समय पर समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोरते रहे हैं।

    सबसे गंभीर आरोप माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना से संबंधित है। एक शिक्षिका मीरा कुमारी ने अपने बकाया वेतन के भुगतान के लिए उच्च न्यायालय में याचिका (CWJC No-24722/2018) दायर की थी। 20 सितंबर 2024 को न्यायालय ने मीरा कुमारी के बकाया वेतन का भुगतान करने और तब तक जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को अपना वेतन न लेने का आदेश दिया था।

    हालांकि पासवान का दावा है कि विधि प्रभारी फनी मोहन की मिलीभगत से जिला शिक्षा पदाधिकारी ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए अपना वेतन निकाल लिया। यह कृत्य न केवल न्यायालय की अवमानना को दर्शाता है, बल्कि विभाग के मनमाने रवैये को भी उजागर करता है।

    पासवान ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कई शिक्षकों ने बकाया वेतन के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि न्यायालय के आदेशों के बावजूद विधि प्रभारी फनी मोहन द्वारा कथित तौर पर षड्यंत्र रचकर और विभागीय अधिकारियों को गुमराह कर एलपीए (LPA 16/2021) जैसे अपील दायर किए गए हैं।

    उदाहरण के लिए मीरा कुमारी के मामले में दायर एलपीए को 19 फरवरी 2025 को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बावजूद कई शिक्षकों को उनके बकाया वेतन के लिए शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

    पासवान ने आरोप लगाया कि जो शिक्षक चढ़ावा (रिश्वत) नहीं देते, उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। एक अन्य मामले CWJC No-18128/2022 (श्री राजेंद्र प्रसाद बनाम राज्य सरकार) में भी शिक्षकों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    श्री पासवान ने जिला पदाधिकारी से पटना उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले जिला शिक्षा पदाधिकारी और विधि प्रभारी फनी मोहन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, फनी मोहन के पदस्थापन से लेकर अब तक उनके कार्यों और कार्यालय की गतिविधियों की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन एवं शिक्षकों के बकाया वेतन का तुरंत भुगतान और उनकी प्रताड़ना को रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की है।

    श्री पासवान ने इस पत्र की प्रतिलिपि बिहार के शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को भी भेजी है। पत्र के साथ पटना उच्च न्यायालय के आदेश की वेब प्रति भी संलग्न की गई है, जो इस मामले की गंभीरता को और पुख्ता करती है।

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