उदासीनता की भेंट चढ़ रहा है बिहारशरीफ रामचंद्रपुर इंडस्ट्रियल एरिया

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ औद्योगिक क्षेत्र जिला प्रशासन की उदासीनता का भेंट चढ़ता जा रहा है। वर्ष 1976 में बियाडा का गठन कर बिहारशरीफ नगर के रामचंद्रपुर में 10 एकड़ का इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया गया था, जिसमें बिहार राज्य चर्म उद्योग निगम का प्लांट, सिलिका की फैक्ट्री, सेंट्रल प्रोसेसिंग प्लांट व कागज की फैक्ट्री संचालित की गई थी, जो धीरे-धीरे बंद हो गयी।

कई लोगों ने उद्योग लगाने के लिए जमीन या भवन सस्ते दर पर आवंटित कर बियाडा की भूमि पर मकान-दुकान बनाकर मोटी राशि पर किराया लगा दिया है। नतीजतन कभी उद्योग-धंधों से गुलजार रहने वाला रामचंद्रपुर का औद्योगिक क्षेत्र में धीरे- धीरे अपनी पहचान खोने लगा।

लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शहरी क्षेत्र में साल 1976 में औद्योगिक प्रागंण का निर्माण किया गया था। बियाडा (बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार) का गठन किया गया था, जिसमें औद्योगिक एरिया बिहारशरीफ का जिक्र है। बियाडा ने औद्योगिक इकाइयों का निर्माण कराया था।

कभी इस प्रागंण में बिहार राज्य चर्म उद्योग निगम का प्लांट था। सिलिका की फैक्ट्री थी, जहां एक बार ब्लास्ट हुआ था तब से सब बंद हो गया। सेंट्रल प्रोसेसिंग प्लांट व कागज की फैक्ट्री भी थी। अब इंडस्ट्रियल एरिया में लोग घर बनाकर रह रहे हैं। समय-समय पर बियाडा नियम बदलता रहता है। एक बार नियम बदला, जिसमें मॉल व होटल

नालंदा जिले में लघु स्केल इंडस्ट्रीज का टर्नओवर- 5040 लाख रुपये सालाना के लिए जमीन दी गई। लेकिन इंडस्ट्री के नाम पर जमीन लेकर कई लोगों ने घर बना लिये हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जिनके नाम से उद्योग लगाने के लिए जमीन या भवन आवंटित किया गया था उनमें से अधिकतर ने उसे भाड़े पर लगा दिया है।

फिलहाल औद्योगिक प्रांगण में 33 लघु उद्योग संचालित हैं, जो 10 एकड़ में इंडस्ट्रियल प्रांगण है। फिलहाल बियाडा (बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार) के अधिकारी के द्वारा यहां के औद्योगिक प्रांगण में आटोमोबाइल सेक्टर, स्वीट व नमकीन, बेकरी, हैंड मेड पेपर, जूट फैक्ट्री, मॉल, ट्यूबवेल पंप, जनरल फैब्रिकेशन यानी की ग्रिल, स्टील बाक्स तथा आलमीरा निर्माण आदि का दावा किया गया।

कामर्शियल हो गयी इंडस्ट्रियल एरिया: करीब चार दशक पूर्व रामचंद्रपुर में औद्योगिक प्रांगण का निर्माण कराया गया था। तब से समय बहुत तेजी से बदलते चला गया। वर्तमान में बियाडा की जमीन का रेट करीब 18 सौ रुपये वर्ग फीट है। इतनी महंगी जमीन में इंडस्ट्री लगाने में कारोबारी घाटे की सौदा मानते हैं।

रामचंद्रपुर का इंडस्ट्रियल एरिया वर्तमान में कामर्शियल जगह हो गयी है। ऐसे शहर के आसपास के सस्ते और पर्याप्त जमीन पर इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करने की जरूरत प्रतीत हो रहा है।

रामचंद्रपुर में औद्योगिक प्रांगण में इंडस्ट्री विकसित करने में सबसे अधिक बाध्यक अपर्याप्त और महंगी जमीन है। यहां से अधिक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग लघु उद्योग स्थापित करने में फायदा देख रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारीः वहीं बियाडा के बिहारशरीफ एरिया इंचार्य मनीष कुमार का कहना है कि गत दो-तीन सालों से बहुत तेजी से औद्योगिक क्षेत्र का विकास कार्य हो रहा है। पांच से सात यूनिट में काम चल रहे हैं। एक दो यूनिट कुछ माह में चालू होने की उम्मीद है। औद्योगिक क्षेत्र को आवंटन कराने के बाद उसमें संबंधित यूनिट नहीं लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कई आवंटित औद्योगिक भूमि वापस लिया गया है।

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