प्राथमिकी के बाद राजगीर नगर परिषद के प्रभारी लेखापाल की खुलने लगी कलई

राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर नगर परिषद में पांव जमाए प्राथमिकी अभियुक्त सहायक टैक्स दारोगा सह प्रभारी लेखापाल के भ्रष्टाचार की कलई खुलकर सामने आने लगी है। उनके द्वारा अपने प्रभाव का नगर परिषद में खूब इस्तेमाल किया गया है।

यही कारण है कि सहायक टैक्स दरोगा रहते उन्होंने लेखापाल की कुर्सी हासिल किया है। उनके द्वारा एक के बाद एक अनेकों अनियमिताएं की गयी हैं। उसमें वित्तीय अनियमितता से लेकर पंजी और संचिका में छेड़छाड़ तक शामिल हैं।

उनके खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए नगर परिषद के वार्ड पार्षदों द्वारा डीएम से लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक फरियाद कर अनेकों बार ज्ञापन सौंपा गया है।

एक ही कार्यालय में दो नाम से नौकरी करने के बावजूद कार्यपालक पदाधिकारी और नगर परिषद बोर्ड द्वारा प्राथमिकी दर्ज होने के पहले कोई कार्रवाई नहीं की गयी। नगर परिषद के पदाधिकारी और बोर्ड सदस्य सब कुछ जानते हुए भी मौन रहे हैं।

जालसाजी और धोखाधड़ी के प्राथमिकी अभियुक्त सहायक टैक्स दरोगा सह प्रभारी लेखापाल प्रमोद कुमार द्वारा अपनी एक नहीं, दो स्कार्पियो को नगर परिषद में भाड़े पर रखवा कर खुद किराये का भुगतान करते रहे हैं।

इतना ही नहीं उनके द्वारा अपने परिजनों को राजगीर नगर परिषद के अलावे सिलाव और गिरियक नगर पंचायत में नौकरी भी दिलवायी गयी है।

आमजन द्वारा निगरानी विभाग के प्रधान सचिव के नाम भेजे गये ज्ञापन में कहा गया है कि डीएम, नालंदा के पत्रांक 35/11 – 1210, दिनांक 12.8.2011 द्वारा प्रमोद कुमार एवं अन्य को बर्खास्त करने का आदेश दिया गया था। बावजूद अबतक वह बेखौफ नौकरी में कार्यरत हैं। ज्ञापन में उनके खिलाफ अनेकों गंभीर आरोप लगाये गये हैं। विभागीय प्रधान सचिव के दूसरे

ज्ञापन पर तत्कालीन वार्ड पार्षद डॉ अनिल कुमार, मीरा कुमारी (दोनों वर्तमान में भी वार्ड पार्षद हैं), प्रवीण कुमार, पिंकू देवी, ज्योति देवी, डॉ देवयानी आर्य, उर्मिला देवी एवं अन्य के हस्ताक्षर हैं।

नौकरी के दौरान ही संस्कृत बोर्ड से ली डिग्री: 2003 में अमरेंद्र कुमार सिन्हा के नाम से प्रमोद कुमार नगर पंचायत, राजगीर में नौकरी करते थे। नौकरी के दौरान ही उनके द्वारा नाम बदलकर (प्रमोद कुमार) स्वामी हंसदेव मुनि उदासीन संस्कृत महाविद्यालय, राजगीर में नामांकन कराया और संस्कृत बोर्ड से डिग्री ली है।

संस्कृत बोर्ड से डिग्री मिलने के बाद अमरेन्द्र कुमार सिन्हा का नाम प्रमोद कुमार हो गया है। उनके द्वारा वास्तविक उम्र को छिपाने के लिए नाम बदलने की चर्चा है। संस्कृत महाविद्यालय से उन्हें प्रमोद कुमार के नाम से डिग्री दी गयी है। उसी शैक्षणिक प्रमाण पत्र पर वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति नौकरी करते रेगुलर विद्यार्थी नहीं बन सकता है। यदि प्रमोद कुमार द्वारा नौकरी करते नियमित विद्यार्थी के रूप में परीक्षा दिया और डिग्री लिया गया है, तो वह भी धोखाधड़ी है। उनके दोनों शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच बाद उम्र छिपाने एवं नाम बदलकर नौकरी करने के राज का भंडाफोड़ हो सकता है।

फिलहाल संस्कृत बोर्ड के सर्टिफिकेट पर प्रमोद कुमार, सहायक टैक्स दरोगा सह प्रभारी लेखापाल के पद पर नौकरी कर रहे हैं।

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