कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय डायट नूरसराय में सत्र 2025-27 के लिए नामांकित 125 डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए शुक्रवार को एक भव्य उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी के साथ दो वर्षीय डीएलएड प्रशिक्षण सत्र का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में शिक्षण पेशे की गरिमा, जिम्मेदारियों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य शहनवाज आलम ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण महज एक डिग्री प्राप्त करने की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक संवेदनशील, जिम्मेदार और समाज-निर्माता शिक्षक बनने की मजबूत नींव है।
उन्होंने कहा कि आज के बदलते शैक्षणिक परिदृश्य में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में प्रशिक्षुओं को अनुशासन, समर्पण और सतत अध्ययन की भावना के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए।
प्रशिक्षण प्रभारी शशि भूषण आनंद ने डीएलएड सत्र की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रशिक्षुओं को केवल शैक्षणिक सिद्धांत ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक शिक्षण कौशल, कक्षा प्रबंधन, पाठ योजना निर्माण, बाल मनोविज्ञान तथा नवाचार आधारित शिक्षण विधियों का भी व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को भविष्य के लिए कुशल, सक्षम और प्रभावी शिक्षक के रूप में तैयार करना है।
इस अवसर पर वरीय व्याख्याता डॉ. पुष्कर कुमार, व्याख्याता मोहम्मद महफुज आलम, अर्चना नाथ, संगम भारती, ओमप्रकाश, डॉ. अनुप सिंह, अरविंद कुमार सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए संस्थान की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन और मूल्यों से अवगत कराया।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षुओं ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने का संकल्प लिया। इस दौरान डायट परिसर में उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और सीखने की ललक का वातावरण स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
समाचार स्रोतः नालंदा दर्पण डेस्क के लिए संतोष भारती की रिपोर्ट।








