Monday, February 16, 2026
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    शिक्षकों के लिए रोजाना परेशानी का सबब बना ई-शिक्षाकोष पोर्टल

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए ई-शिक्षाकोष पोर्टल ने शिक्षकों के लिए कई चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी हैं। शिक्षकों की आम शिकायत है कि यह एप अक्सर सही समय पर काम नहीं करता है। कभी-कभी तो यह एप शिक्षकों को प्रेज़ेंट दिखाने के बजाय उन्हें अब्सेंट दर्शाता है। इस स्थिति में शिक्षकों को दिन भर स्कूल में अपने मामलों को सुलझाने में समय बिताना पड़ता है।

    बता दें कि बिहार शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन हाजिरी के आधार पर वेतन देने का जो आदेश जारी किया है। यह शिक्षकों के लिए बेहद तनावपूर्ण बन गया है। इस एप के माध्यम से हाजिरी दर्ज कराने के लिए शिक्षकों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है। कई बार तो यह एप शिक्षकों को अपनी छुट्टियाँ भी ले लेने नहीं देता है। ऐसी असुविधाएँ शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।

    वेशक ई-शिक्षा पोर्टल का यह संदिग्ध कार्यप्रणाली केवल शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। शिक्षकों को पढ़ाने की बजाय दिनभर एप में इन-आउट करने में लगा रहना पड़ता है। यह परेशानी ना केवल उन्हें मानसिक तनाव देती है, बल्कि छात्रों की शिक्षा को भी प्रभावित करती है। इस मुद्दे पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। ताकि शिक्षकों को इस एप के उत्पीड़न से राहत मिल सके।

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    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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