Friday, February 13, 2026
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    युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति: जानें कारण और निदान

    नालंदा दर्पण डेस्क। आधुनिक समाज में आत्महत्या एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, विशेषकर युवाओं पर अधिक हावी है। जहां एक ओर युवाओं को अपनी जिंदगी के सुनहरे सपने देखने चाहिए, वहीं दूसरी ओर वे इतनी निराशा और अवसाद में डूब रहे हैं कि आत्महत्या का सहारा ले रहे हैं। इस आलेख में हम इस प्रवृत्ति के कारणों और निदान पर चर्चा करेंगे।

    आत्महत्या की प्रवृत्ति के कारणः

    • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं- अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार, और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं। युवा अक्सर इन समस्याओं का सामना करने में असमर्थ होते हैं और उन्हें उचित सहायता नहीं मिलती।
    • अत्यधिक अपेक्षाएं और दबाव- शिक्षा, करियर, और सामाजिक मानदंडों से जुड़ी अत्यधिक अपेक्षाएं और दबाव युवाओं को मानसिक रूप से थका देते हैं। प्रतिस्पर्धा का बढ़ता स्तर और असफलता का डर उन्हें निराश कर सकता है।
    • सोशल मीडिया और साइबर बुलिंग- सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना, ट्रोलिंग, और साइबर बुलिंग युवाओं के आत्मसम्मान को गहरा आघात पहुंचा सकती है। वे खुद को दूसरों से तुलना करते हैं और अपनी कमियों को बढ़ा-चढ़ा कर देखते हैं।
    • सम्बन्धों की समस्याएं- पारिवारिक कलह, प्रेम सम्बंधों में असफलता, और मित्रों से मतभेद युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। वे खुद को अकेला और असमर्थ महसूस करने लगते हैं।
    • नशे की लत-शराब, ड्रग्स, और अन्य नशीले पदार्थों की लत युवाओं को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर सकती है। नशा उनकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ देता है।

    आत्महत्या की प्रवृत्ति के निदानः

    • मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता- मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, और समुदायों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। युवाओं को अवसाद, चिंता, और अन्य समस्याओं के लक्षण पहचानने और उनकी सही समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
    • परामर्श और थेरेपी- पेशेवर परामर्श और थेरेपी की सेवाएं आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। युवाओं को इन सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि वे अपनी समस्याओं का सही समाधान प्राप्त कर सकें।
    • सकारात्मक वातावरण का निर्माण- परिवार, स्कूल, और कार्यस्थलों में सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए, जहां युवा खुलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकें और उन्हें उचित समर्थन मिल सके।
    • सामाजिक समर्थन- मित्रों, परिवार और समुदाय के सदस्यों से सामाजिक समर्थन महत्वपूर्ण है। युवाओं को यह महसूस होना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं और उनके साथ खड़े लोग हैं जो उनकी सहायता कर सकते हैं।
    • स्वस्थ जीवनशैली- शारीरिक स्वास्थ्य भी मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
    • सोशल मीडिया का सही उपयोग- सोशल मीडिया का संतुलित और सकारात्मक उपयोग प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। युवाओं को यह सिखाया जाना चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली जानकारी को समालोचनात्मक दृष्टिकोण से देखें और खुद को दूसरों से तुलना न करें।

    निष्कर्षः आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, सामाजिक समर्थन, और सकारात्मक जीवनशैली युवाओं को इस अंधकार से बाहर निकाल सकती है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे युवा मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनें, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

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    नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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