बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कार्यपालक सहायकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य नियमित नियुक्ति, बेहतर सेवा शर्तें और सुरक्षित नौकरी जैसी मांगों का समाधान करवाना है।
कार्यपालक सहायकों का कहना है कि उनकी मेहनत और योगदान को सरकार ने अब तक उचित महत्व नहीं दिया। जबकि उनकी भूमिका राज्य की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और अभियानों में केंद्रीय है।
बिहार राज्य कार्यालय सहायक सेवा संघ ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की योजना बनाई है।
19-21 अगस्त 2025: सभी विभागों में कार्यरत कार्यपालक सहायक काला बिल्ला पहनकर विरोध दर्ज करेंगे।
23 अगस्त 2025: जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकाले जाएंगे।
24 अगस्त 2025: पटना में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।
26-27 अगस्त 2025: दो दिवसीय सामूहिक अवकाश के साथ धरना-प्रदर्शन।
29 अगस्त 2025 से: अनिश्चितकालीन कलम बंद हड़ताल और धरना-प्रदर्शन की शुरुआत।
कार्यपालक सहायकों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी भूमिका राज्य निर्वाचन आयोग, भू-राजस्व विभाग, पंचायती राज विभाग जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में अहम है। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
नियमित नियुक्ति: संविदा और दैनिक भोगी कर्मचारियों को स्थायी करने की गारंटी।
बेहतर सेवा शर्तें: वेतनमान और सुविधाओं में सुधार।
सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी: कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना।
परिवारों के लिए सहायता: आकस्मिक दुर्घटना या बीमारी के कारण मृत्यु होने पर कर्मचारियों के परिवारों को सहायता प्रदान करना।
बिहार राज्य कार्यालय सहायक सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशीष कुमार का कहना है कि हमारे बिना सरकार की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन असंभव है। फिर भी, हमारी मांगों को वर्षों से अनदेखा किया जा रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्यपालक सहायकों के स्थायीकरण की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो बड़े पैमाने पर आंदोलन अनिवार्य होगा।
संघ ने यह भी बताया कि कई कार्यपालक सहायक संविदा और दैनिक भोगी के रूप में लंबे समय से नियमित कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समान दर्जा और वेतनमान नहीं मिला है। कुछ कर्मचारियों की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके परिवारों को कोई सहायता नहीं मिली, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और गहरा गया है।
कार्यपालक सहायकों और संविदाकर्मियों ने सरकार से तत्काल अपनी समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि उनकी मेहनत और समर्पण को नजरअंदाज करना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं की प्रगति भी प्रभावित हो सकती है।
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस आंदोलन में बिहार के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे सरकारी कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।








