कई प्रदेशों में मशहूर हो रहा है नालंदा के इन गांवों का मकोय

नालंदा दर्पण डेस्क। ऐसे तो मकोय और फुटकुन के पौधे अमूमन खाली खेत अथवा अन्य स्थानों पर उग आते हैं। दोनों ही फल बहुत छोटे होते हैं। लेकिन, इनमें बड़े-बड़े गुण छुपे हैं। बड़े से बड़े रोगों में इसका उपयोग दवा से भी अधिक कारगर माना जाता है।

इसे किसी भी रूप में उपयोग करना मानव के लिए लाभकर है। वैसे तो हर मौसमी फल का उपयोग करना चाहिए। लेकिन फुटकून, मकोय के फल जितने छोटे होते हैं, उतने ही उनमें बड़े-बड़े गुण हैं। किडनी को दुरुस्त रखने में यह फल काफी कारगर है। मकोय काफी फायदेमंद फल है।

फुटकून की व्यवसायिक खेती संभव नहीं है। लेकिन मकोय की खेती सिलाव प्रखंड के दर्जनभर गांवों के पांच हजार से अधिक किसानों द्वारा बड़ी तादाद में की जाने लगी है। इसकी फसल उगाने वालों का अप्रत्याशित लाभ और उनकी समृद्धि देख हर साल किसानों की संख्या व रकबा की बढ़ोतरी हो रही है।

कहते हैं कि 15 साल पहले सब्बैत गांव के एक किसान ने इस्लामपुर के दत्तासराय गांव निवासी रिश्तेदार के यहां से बिचड़ा लाया था। गांव के पास के पांच कट्ठे में नमूने के तौर पर उगाया। उस वक्त उन्हें पट्टे पर खेती करने वाले ने फसल उगाने से साफ मना कर दिया था। लेकिन, जिद पर अड़े असगर अली ने खुद की मेहनत के बूते पांच कट्ठा में मकोय की खेती की।

चूकि रिश्तेदार की मदद से बिचड़ा व खुद की मेहनत लगी तो खर्च नगण्य रहा। लेकिन, उस वक्त सस्ती के जमाने में प्रति कट्टा 10 मन मकोय उपजा। इससे तकरीबन 10 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हुई। इस तरह, पांच कट्ठे की खेती ने 50 हजार रुपये का मुनाफा दिया। लागत नगण्य और आमदनी डबडब यह देख गांव के 50 से अधिक किसानों ने अगले साल यह फसल लगायी।

फिलवक्त आस-पास के नियामतनगर, रघुबिगहा, रानीबिगहा, खादुपुर, धरहरा समेत दर्जनभर गांवों में मकोय की वृहत पैमाने पर खेती होने लगी है। प्रति कट्ठा डेढ़ से दो हजार रुपये लागत आती है। जबकि, आय 20 से 30 हजार रुपये होती है।

नालंदा के मकोय सिलाव प्रखंड में उपजने वाले मकोय को आसपास के जिलों के साथ ही राजधानी पटना, कोलकाता, नई दिल्ली, झारखंड, उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है। अन्य प्रदेशों के कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए 50 से अधिक छोटे व्यापारी काम कर रहे हैं।

एक व्यापारी अनुसार कोलकाता में 5-10 अथवा 20 का गुच्छा बनाकर मकोय बेचा जाता है। इस तरह, कोलकाता में 200 रुपये किलो तक बेचा जाता है। शुरुआत में किसानों से 90-100 रुपये प्रति किलो मकोय खरीदा जाता है। लेकिन, इन दिनों 20-25 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदा जा रहा है।

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