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    Monday, February 26, 2024
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      नालंदा पुरातत्व संग्रहालय में तीन प्राचीन मूर्तियों का लोकार्पण

      नालंदा दर्पण डेस्क। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अंतर्गत नालंदा के पुरातत्व संग्रहालय में तीन प्राचीन मूर्तियों की स्थायी प्रदर्शनी के रूप में लोकार्पण हुआ है। ये सभी मूर्तियां इस संग्रहालय में वर्षों से रिजर्व कलेक्शन में सुरक्षित रखी गयी थीं।

      इन मूर्तियों में जैन, बौद्ध तथा हिंदू धर्म से संबंधित हैं। इन मूर्तियों को संग्रहालय परिसर में एक स्कल्प्चर शेड बनाकर रखा गया है। इन मूर्तियों के लगने से पर्यटकों एवं मूर्ति कला में रुचि रखने वाले लोगों को नयी जानकारी मिलेगी।

      इस अनूठे संग्रह से लोग अवगत होंगे। खासकर मूर्तिकला पर अनुसंधान कर रहे शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा। इन मूर्तियों के बारे में जानकारी हेतु इनफार्मेशन साइनेज भी लगाए गये हैं। उन मूर्तियों का विवरण इस प्रकार है।

      विष्णु बसाल्ट प्रस्तर: मुकुटधारी सिरोभूषण से अलंकृत चतुर्भुजी विष्णु की इस स्थानक प्रतिमा में उन्हें शंख, चक्र, गदा तथा पद्म लिये हुये दर्शाया गया है। उनके दोनों ओर स्त्री एवं पुरुष परिचारक की मूर्ति है।

      कमल पीठिका के दोनों ओर बैठे उपासक को दर्शाया गया है। यह मूर्ति बिहारशरीफ से 1959 ईस्वी में इस संग्रहालय को प्राप्त हुआ है। इसकी इसकी लंबाई 136 सेंटीमीटर है।

      लघु चतुर्मुखी जैन मंदिर बसाल्ट प्रस्तर मूर्ति: यह शिखरयुक्त चौमुखी जैन मंदिर है। यह राजगीर के सोनभंडार की गुफा से प्राप्त हुआ है। इस संग्रहालय में 1940 के दशक में इसे लाया गया है।

      इस मंदिर में चारों और अलग-अलग जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं, जो क्रमशः ऋषभदेव, अजीतनाथ, संभावनाथ तथा अभिनंदन नाथ की हैं। उन्हें जैन धर्म में प्रथम चार तीर्थंकर माना गया है।

      सभी तीर्थंकर के दोनों और चवर धारण किये हुए पुरुष परिचर तथा गंधर्व की मूर्तियां हैं। तीर्थंकर के ऊपर लघु छात्राबलि है, जिसके सिर पर आम्लकलश बना है।

      सभी तीर्थंकरों के चरण के नीचे पीठिका पर उनके व्यक्तिगत वाहन व लांछन अर्थात ऋषभ, हाथी, घोड़ा तथा बंदर उत्कीर्ण है। इस संपूर्ण कला स्वरूप को मूर्ति व स्थापत्य कला में सर्वतोभद्र आकृति कहा जाता है। यह जैन धर्म में अति पवित्र माना जाता है। इसकी लंबाई 132 सेंटीमीटर है।

      बुद्ध बसाल्ट प्रस्तर मूर्तिः भूमि स्पर्श मुद्रा में बुद्ध को एक पीपल वृक्ष के नीचे सिंहासन पर बैठे दर्शाया गया है। उनके दायीं ओर बोधिसत्व एवं बायीं ओर मैत्रेय खड़े हैं। उष्णीष सुसज्जित घुंघराले बालों से युक्त बुद्ध के ऊपर प्रभावलि के दोनों और पुष्प की माला लिये गंधर्वों को दर्शाया गया है।

      प्रभामंडल में संस्कृत में बौद्ध मंत्र ‘ये धर्म हेतु प्रभवा हेतुं तेषां तथागतः ह्यवदत् तेषां च यो निरोध एवं वादी महाश्रमणः’ का अभिलेख उत्कीर्ण है। यह मूर्ति इस संग्रहालय को 1992 ई. में प्राप्त हुई है। इसकी लंबाई 140 सेमी है।

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