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    Sunday, April 21, 2024
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      चीन की दीवार से भी प्राचीन है राजगीर का सायक्लोपियन वाल, नालंदा का दूसरा बड़ा धरोहर

      नालंदा दर्पण डेस्क। दुनिया के 7 अजूबों में शुमार द ग्रेट वाल आफ चाइना के चर्चे तो आपने काफी सुनी होंगी। मगर रूकिए। क्या आपको पता है कि चीन की दीवार से भी पुरानी करीब 40 किलोमीटर लंबी और काफी मजबूत एक दीवार बिहार में भी है।

      राजगीर की साइक्लोपियन वाल दुनिया की नजरों से ओझल ढाई हजार पुरानी इंजीनियरिग का नायाब नमूना है। यह दीवार राजगीर की पंच पहाड़ियों को जोड़ती है। मगध साम्राज्य के सुरक्षा प्राचीर अब सायक्लोपियन वाल के नाम से जाना जाता है।

      यह दीवार इतनी पुरानी है कि इसे विश्व धरोहर में शामिल किए जाने की मुहिम भी शुरू हो चुकी है। मान्यता है इस महान दीवार की नींव पूर्व महाभारत काल में राजा बृहद्रथ ने राज्य की सुरक्षा के लिए रखी थी। बाद में उनके पुत्र सम्राट जरासंध ने इसे पूरा किया। पाली ग्रंथों में भी इस सुरक्षा दीवार का उल्लेख है।

      नालंदा, गया व नवादा जिले के सीमा से सटे राजगीर मुख्य प्रवेश द्वार स्थित वनगंगा के दोनों ओर के सोनागिरि एवं उदयगिरी पर्वत पर सायक्लोपियन वाल का विहंगम दृश्य शुरू होता है, जो पंच पहाड़ियों पर मगध साम्राज्य काल के समृद्धिशाली अतीत की यादें समेटे हुए राजगीर की सुरक्षा में तैनात नजर आता है। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

      पुरातत्वकर्मी की मानें तो उस वक्त 32 विशाल तथा 64 छोटे प्रवेश द्वार हुआ करता था। जिसके माध्यम से ही शहर मे प्रवेश किया जा सकता था। वहीं इस दीवार के हर 50 मीटर की दूरी पर एक विशेष सुरक्षा चौकी तथा हर 5 गज पर सशस्त्र सैनिक व उनका झुंड प्रहरी के रूप में तैनात रहा करता था।

      सीएम नीतीश कुमार ने अप्रैल महीने में राजगीर प्रवास के दौरान सायक्लोपियन वाल का जिक्र करते हुए इसे चीन की दीवार से भी अतिप्राचीन बताया है।

      उस समय उन्होंने कहा था कि सायक्लोपियन वाल विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने की हर मानकों पर खरा उतरता है। साइक्लोपियन वाल को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

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