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ऑनलाइन जमाबंदी डिजिटाइजेशन में भारी गड़बड़ी, खुद करें ऐसे सुधार

हिलसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में ऑनलाइन जमाबंदी डिजिटाइजेशन में भारी गड़बड़ी सामने आई है। अब तक करीब 75 फीसदी ऑनलाइन जमाबंदी में संशोधन किया जा चुका है। जिसमें रैयत मालिकों के नाम, पता, रकवा और चौहद्दी में सबसे अधिक त्रुटियां दर्ज की गई हैं। कई अंचलों में तो पूरी की पूरी जमाबंदी में बदलाव किया गया है। जिससे जमीन मालिकों में भारी रोष है।

कई रैयत मालिकों का आरोप है कि जमाबंदी का ऑनलाइन एंट्री करने के दौरान जानबूझकर गलतियां की गईं। ताकि बाद में इन्हें सुधारने के नाम पर अवैध उगाही की जा सके। इस गड़बड़ी के कारण हजारों जमीन मालिक अपनी जमीन के स्वामित्व को लेकर असमंजस में हैं।

राज्य सरकार ने बीते वर्ष जुलाई में इस समस्या के समाधान के लिए ‘परिमार्जन प्लस’ पोर्टल लॉन्च किया। इसके जरिए अब तक 772004 में से 579466 जमाबंदी में संशोधन किया गया है। हाल ही में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत प्रत्येक मौजा में कैंप लगाकर मूल जमाबंदी को डिजिटाइजेशन से मिलान किया जाएगा।

विभाग के सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस अभियान को ‘मिशन मोड’ में पूरा किया जाएगा और ऑनलाइन जमाबंदी सुधार की अंतिम तिथि 15 मार्च 2025 तय की गई है। अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे शिविर में आने वाले रैयतों की ऑनलाइन जमाबंदी को स्कैन की गई मूल जमाबंदी से मिलान कर सुधार करें।

रैयत अपनी जमाबंदी में त्रुटि सुधार के लिए ‘परिमार्जन प्लस’ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बिहार भूमि पोर्टल पर रजिस्टर करें और लॉगिन करें। ‘परिमार्जन’ मेनू पर क्लिक करें और ‘डिजिटाइज्ड जमाबंदी’ विकल्प चुनें। पुरानी जमाबंदी में सुधार के लिए आवेदन करें। नाम, पिता का नाम, पता, खाता, खेसरा, चौहद्दी और लगान जैसी जानकारी को सही करें। भरे गए आवेदन को अंचल अधिकारी के पास भेजें।

राजस्व व भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस विशेष अभियान को गंभीरता से लें और इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।

इस अभियान से हजारों भूमि मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन इसमें भी पूरी सतर्कता की जरूरत है। जिन लोगों की जमाबंदी में गलतियां हैं, उन्हें समय रहते अपने दस्तावेजों को अपडेट करवाना चाहिए। ताकि आगे किसी भी प्रकार की समस्या न हो।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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