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    Thursday, July 18, 2024
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      बिहार का सबसे बड़ा वक्फ संस्थान सोगरा वक्फ इस्टेट में गरीबों के बीच कंबल का वितरण

      नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार राज्य का सबसे बड़ा वक्फ संस्थान सोगरा वक्फ इस्टेट में मोतवल्ली मुख्तारुल हक, उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद सुल्तान अंसारी, नाएब अव्वल सैयद ज़ैद अहमद एवं सोगरा हाई स्कूल के सचिव आफताब आलम आदि की उपस्थिति में गरीबों के बीच इस कड़ाके की ठंड में उन्हें बचाने की भावना से कंबल का वितरण किया गया।

      Distribution of blankets among the poor in Sogra Waqf Estate the largest Waqf institution of Bihar 2बीबी सोगरा, जो सोगरा वक्फ इस्टेट की स्थापिका थीं, राष्ट्र के प्रति बहुत सहानुभूति रखती थीं। इसी बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि उन्होंने राष्ट्र के गरीबों, विधवाओं और अनाथों की समस्याओं को हल करने के लिए अपनी सारी सम्पत्ति समर्पित कर दिया। इसी कारण वक्फ संपत्ति से हुए आय का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाता है। वैसे भी ये इस्टेट साल भर जरूरतमंदों की आर्थिक मदद करती है।

      इस अवसर पर मोतवल्ली मोख्तारुल-हक ने कहा कि राष्ट्र के लोग आज भी विकट स्थिति में जीने को मजबूर हैं। कुछ लोग ऐसे हैं, जिनकी दिनचर्या की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसलिए हमारी संस्था ने उनके बीच कंबल बांटकर एक छोटा सा प्रयास किया है।

      उन्होंने सक्षम समाजसेवियों से अनुरोध किया कि वे इस ठंड के मौसम में गर्म कपड़े वितरित करें, जिससे गरीबों और जरूरतमंदों को इस मौसम में स्वस्थ्य रह सके।Distribution of blankets among the poor in Sogra Waqf Estate the largest Waqf institution of Bihar 3

      मोतवल्ली ने कहा कि सोगरा वक्फ इस्टेट के सभी पदाधिकारी और सदस्यगण इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। दरअसल, वे देश से प्रेम करने वाले और गरीबों के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोग हैं।

      इस अवसर पर सोगरा वक्फ इस्टेट के अध्यक्ष सैयद शाह सैफुद्दीन फिरदौसी ने कहा कि अल्लाह तआला की रजा समाज कल्याण में है। अल्लाह के रसूल मोहम्मद मुस्तफा ने कहा कि जो लोगों के ज़रूरत में काम आएगा, अल्लाह तआला उसकी ज़रूरत में काम आएगा। अल्लाह तआला की खुशी के लिए उसके बनाए हुए का हक़ अदा करना है, न सिर्फ इंसान बल्कि जानवरों का भी। इसी बात के तहत सोगरा वक्फ इस्टेट के जरीय कई संस्थाएं कायम कर अल्लाह के मखलूकों का हक अदा किया जा रहा है।

      उन्होंने आगे कहा कि सेवा मूल रूप से तीन तरीकों से की जा सकती है, एक है वित्तीय सेवा, यानी अपना धन दूसरे जरूरतमंद लोगों पर खर्च करना, और दूसरा तरीका है शारीरिक सेवा, यानी अपने शरीर से ऐसे काम करना, जिससे मानवता को मदद मिले। हमारा प्रयास है कि एक बेहतर प्रबंधन बहाल किया जाए, ताकि सोगरा वक्फ इस्टेट अपने पूर्व गौरव को प्राप्त कर सके।

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