बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार की सियासत में एक बार फिर डोमिसाइल नीति (Bihar Domicile Policy) को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक प्रो. चन्द्रशेखर ने शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव (एसीएस) केके पाठक पर गंभीर आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी है।
प्रो. चन्द्रशेखर ने दावा किया कि बिहार में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति को लागू करने की मांग को नजरअंदाज करने के पीछे केके पाठक की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार के बाहर के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने साजिश रचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह समझाने में सफलता हासिल की कि डोमिसाइल नीति उनकी राष्ट्रीय छवि को धूमिल कर सकती है।
प्रो. चन्द्रशेखर ने अपने बयान में कहा कि बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने के लिए मैंने विधानसभा में गैर सरकारी संकल्प पेश किया था, लेकिन सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह स्पष्ट करता है कि डोमिसाइल नीति केवल तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के प्रयासों के कारण ही कुछ समय के लिए लागू हो पाई थी। लेकिन बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के पहले चरण (TRE-1) के विज्ञापन के महज एक महीने बाद, जब केके पाठक ने शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में योगदान दिया तो उन्होंने तुरंत इस नीति को वापस ले लिया।
उन्होंने आगे कहा कि यह कदम बिहार के युवाओं के हितों के खिलाफ था और इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। प्रो. चन्द्रशेखर ने दावा किया कि बिहार के बाहर के कुछ बड़े अधिकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव डाला और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि डोमिसाइल नीति लागू करने से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता और छवि को नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने आगे कहा कि यह बिहार के लोगों के साथ धोखा है। शिक्षा विभाग में लाखों बहालियों के लिए डोमिसाइल नीति जरूरी थी। ताकि राज्य के युवाओं को प्राथमिकता मिले, लेकिन इसे जानबूझकर हटा दिया गया।
इस बयान में प्रो. चन्द्रशेखर ने भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ को भी टैग करते हुए कहा कि मैंने जो सच सामने रखा है, अगर इसके बाद भी बिहारवासियों के मन में कोई संदेह रह जाता है तो मुझे पूरा यकीन है कि 2024 के बिहार विधानसभा बजट सत्र में मेरे द्वारा तिथिवार किए गए खुलासे आपके सभी संदेह दूर कर देंगे’।
उन्होंने संकेत दिया कि बजट सत्र में वे इस मुद्दे पर विस्तृत जानकारी और सबूत पेश करेंगे। जिससे इस मामले की परतें और खुलेंगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बिहार में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया और डोमिसाइल नीति को लेकर पहले से ही बहस छिड़ी हुई है। बीपीएससी के माध्यम से हो रही शिक्षक बहाली में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों की भारी संख्या ने स्थानीय युवाओं में नाराजगी पैदा की है। प्रो. चन्द्रशेखर का यह आरोप न केवल शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी केके पाठक पर सवाल उठाता है, बल्कि नीतीश सरकार की नीतियों पर भी विपक्ष को हमला करने का मौका देता है।
राजद और भाकपा माले जैसे विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी ओर सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हालांकि मौजूदा शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने हाल ही में विधानसभा में कहा था कि शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और बहाली प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार ही चल रही है।
वहीं प्रो. चन्द्रशेखर के ताजा बयान ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। अब सभी की नजरें आगामी विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां इस मुद्दे पर और गर्मागर्मी होने की संभावना है। क्या यह आरोप नीतीश सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा या विपक्ष इसे अपने पक्ष में भुनाने में कामयाब होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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