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    Sunday, March 3, 2024
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      प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के खिलाफ जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग

      बेन (नालंदा दर्पण)। बेन अंचल कार्यालय में घोर अनियमितता, बिचौलियों के माध्यम से मोटी रकम की बसूली करने एवं सांख्यिकी पदाधिकारी द्वारा जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने में मोटी रकम की उगाही करने को लेकर गुरुवार को सैंकड़ों ग्रामीणों की हस्ताक्षरयुक्त आवेदन जिलाधिकारी को सौंपा गया और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कारवाई की मांग की।

      बता दें कि अंचल कार्यालय एवं जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कार्यालय में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि बिना नजराना दाखिल खारिज एवं प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाता।

      जिलाधिकारी को दिए हस्ताक्षरयुक्त आवेदन में लिखा है कि अगर रैयतों को भूमि संबंधी कार्य कराना हो तो इसके लिए बिचौलिए से संपर्क साधना होगा क्योंकि उसी के पास सरकारी रजिस्टर टू का रेकॉर्ड होता है। तथा सरकारी बाबूओं की तरह कार्यालय में बैठकर कार्य निपटाते हैं तथा इस कार्य के लिए बिचौलियों द्वारा रैयतों से मोटी रकम की उगाही की जाती है।

      ठीक इसी प्रकार जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले कार्यालय के अधिकारियों की है। जहाँ प्रमाण पत्र लेने के लिए मोटी रकम की उगाही की जाती है। नहीं देने पर छ: छ: महीने टहलाए जाते हैं।

      सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि जब कोई सामाजिक कार्यकर्ता इस संबंध में प्रखंड के पदाधिकारी से बात करने पर साहब का गुस्सा आसमान चढ़ जाता है और सरकारी कार्य में बाधा डालने की बात कह केस करने की धमकी देते हैं।

      इन दोनों मामले को लेकर बीते महीनों में साक्ष्य के साथ अंचल के नाजिर और बिचौलिए द्वारा रजिस्टर टू में हेराफेरी करते एवं सांख्यिकी पदाधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र के लिए नजराने लेते वीडियो वायरल हुआ था। पुनः इसी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द कुमार उर्फ भोली ने सैकड़ों लोगों की हस्ताक्षरयुक्त आवेदन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर को सौंप कारवाई की मांग की है।

      हस्ताक्षरयुक्त सौंपे गए आवेदन में रामप्रवेश प्रसाद, बिपिन कुमार, रविंद्र कुमार, सतेन्द्र सिंह, अर्जुन प्रसाद, सुनील कुमार, अरविन्द यादव, कृष्णा प्रसाद, कृष्णदेव प्रसाद, पंकज कुमार, सुधीर प्रसाद, नन्दे पासवान, उज्जवल कुमार, नागेंद्र सिंह, प्रकाश प्रसाद, श्यामसुंदर प्रसाद, कांति देवी, मंजु देवी, कमलेश कुमार सहित सैंकड़ों ग्रामीण शामिल हैं।

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