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    Saturday, July 20, 2024
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      निगरानी धावा दल की जांच में राजगीर नगर कार्यपालक पदाधिकारी की गर्दन फंसना तय

      यह जांच केवल कार्यपालक पदाधिकारी मो. जफर इकबाल के कार्यकाल में कराये गये विभागीय योजनाओं और कार्यों की हो रही है। इस जांच से नगर परिषद में खलबली मची हुई है। सब की नजर निगरानी धावा दल की रिपोर्ट पर लगी है...

      नालंदा दर्पण डेस्क। राजगीर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में संपन्न योजनाओं के कार्यों में गड़बड़ी और अनियमिता को लेकर नालंदा जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कड़ा रुख अपनाया है।

      जिलाधिकारी ने तत्काल कार्यपालक पदाधिकारी मो. जफर इकबाल को राजगीर से हटाकर गिरियक नगर पंचायत का दायित्व दिया है। जबकि प्रशिक्षु आइएएस दिव्या शक्ति को राजगीर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है।

      इधर, कार्यपालक पदाधिकारी मो. इकबाल के कार्यकाल में विभागीय योजनाओं और कार्यों की जांच चल रही है। अगर जांच में गड़बड़ी पायी जाती है, तो उक्त कार्यपालक पदाधिकारी की आय से अधिक की संपत्ति की भी जांच करायी जा सकती है। नगर परिषद, राजगीर के विभागीय योजनाओं की जांच जिला निगरानी धावा दल द्वारा किया जा रहा है।

      यह जांच केवल कार्यपालक पदाधिकारी मो. जफर इकबाल के कार्यकाल में कराये गये विभागीय योजनाओं और कार्यों की हो रही है। इस जांच से नगर परिषद में खलबली मची हुई है। सब की नजर निगरानी धावा दल की रिपोर्ट पर लगी है।

      जिलाधिकारी शशांक शुभंकर इस जांच के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि लगाये गये आरोपों के अनुसार विभागीय योजनाओं की निष्पक्षता से जांच करायी जा रही है। जांच के जद में आने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। जांच आरंभ होने के बाद पदाधिकारियों सहित नगर परिषद के सभी स्तर के कर्मियों के दिल की धड़कन बढ़ गयी है।

      फिलहाल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जफर इकबाल को गिरियक नगर पंचायत का दायित्व जिलाधिकारी ने दिया है। हालांकि 21 नवंबर से ही प्रशिक्षु आइएएस दिव्या शक्ति को राजगीर के कार्यपालक पदाधिकारी का दायित्व दिया गया है। वे अगले आदेश तक नगर परिषद की बतौर कार्यपालक पदाधिकारी काम करतीं रहेंगी।

      जांच में किस -किस पर गाज गिर सकती है, इसकी भी अटकलें लगनी आरंभ हो गयी है। यदि विभागीय योजनाओं के निर्माण में गड़बड़ी और अनियमितता पकड़ी गयी, तो कार्यपालक पदाधिकारी का फंसना तय माना जा रहा है।

      उनके अलावा कनीय अभियंता जिनके द्वारा योजनाओं की प्रारंभिक जांच की जाती है और एमबी तैयार की जाती है, वह भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। सहायक अभियंता और कार्यपालक अभियंता के अलावा जिनके नाम से योजना का एग्रीमेंट किया गया है वह भी कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं।

      आरोप लगाया गया है कि कार्यपालक पदाधिकारी मो जफर इकबाल द्वारा नगर परिषद के विभागीय कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता की गयी है। उनके द्वारा व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए विभागीय योजनाओं का काम दिया गया है।

      यह भी शिकायत है कि कुछ योजनाओं का क्रियान्वयन कराये बिना ही भुगतान कर दिया गया है। कुछ योजनाओं का गलत ढंग से भुगतान करने का मामला भी जांच में सामने आ रहा है।

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