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    Friday, April 12, 2024
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      तीसरी बार बनीं जिला परिषद की अध्यक्ष बनी तनुजा, जानें क्यों हारी पिंकी

      बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। करीब दो महीने तक नालंदा जिला परिषद की गरमाई हुई राजनीति मत विभाजन के बाद ठंडा पड़ गया। समाहरणालय स्थित हरदेव भवन में जिला परिषद अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की गयी।

      इस निर्वाचन में तनुजा कुमारी अपने प्रतिद्वंदी जिला परिषद की पूर्व अध्यक्षा पिंकी कुमारी को सात मतों से पराजित किया। मतदान में तनुजा कुमारी को कुल 20 मत प्राप्त हुए, जबकि पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष पिंकी कुमारी को मात्र 13 मत प्राप्त हुए।

      जिला परिषद सदस्यों की यह गोलबंदी शुरू में ही बनी थी जो अंतिम दिनों तक बनी रही और तनुजा कुमारी को जीत दिलाने में सफल रहा। इधर, जिला परिषद उपाध्यक्ष के पद पर नरोत्तम कुमार 17 मत प्राप्त कर विजेता बने। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी अनुराधा देवी को कुल 11 मत और जुली कुमारी को मात्र पांच मत प्राप्त हुए।

      मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिला परिषद अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया करायी गयी। भारी गहमा-गहमी के बीच निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की गयी।

      जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता एवं प्रेक्षक की उपस्थिति नालंदा जिला परिषद अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद का निर्वाचन स्वच्छ, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया।

      सर्वप्रथम जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा सभी जिला परिषद सदस्यों को स्वच्छ, निष्पक्ष एवं पारदर्शी वातावरण में नाम निर्देशन, मतदान, मतगणना मत अविधिमान्य से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गयी।

      निर्वाचन की प्रक्रिया बैलेट पेपर के माध्यम से पारदर्शी तरीके से संपन्न करायी गयी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा विजेता जिला परिषद अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को प्रमाण पत्र प्रदान करने के साथ ही साथ शपथ भी दिलायी गयी।

      इस अवसर पर सहायक समाहर्ता, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित सभी जिला परिषद सदस्य एवं संबंधित पदाधिकारी तथा कर्मी उपस्थित थे।

      तनुजा कुमारी को तीसरी बार मिली अध्यक्ष की कुर्सी: जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में तनुजा कुमारी को तीसरी बार अध्यक्ष बनने का मौका मिला है। इसके पहले वह वर्ष 2016 में जिला परिषद अध्यक्ष बनी थी। बाद में 2021 में भी उनका अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था।

      नालंदा जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में उनके बेहतर कामकाज के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा उन्हें वर्ष 2022 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

      जिला परिषद सदस्यों पर उनकी शुरू से ही पकड़ रही है। हालांकि बीच में कुछ ऐसी राजनीति हुई की उन्हें अध्यक्ष पद का मौका नहीं मिला था। यह मौका उन्हें अब मध्यावधि चुनाव के माध्यम से मिल गया है।

      छह जनवरी से शुरू हुआ जिप की तख्ता पलट राजनीति : जिला परिषद की राजनीति में विगत छह जनवरी से ही उठा-पटक शुरू हो गयी थी। उस समय तनुजा कुमारी के नेतृत्व में 10 सदस्यों के द्वारा तात्कालिक अध्यक्ष पिंकी कुमारी तथा उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विशेष बैठक बुलाने की मांग की गयी थी।

      विशेष बैठक नहीं बुलाने पर इसकी शिकायत जिला पदाधिकारी से की गयी थी और बाद में जिला पदाधिकारी के द्वारा ही जिला परिषद की विशेष बैठक बुलाकर मत विभाजन की प्रक्रिया पूरी की गयी। जिसमें तात्कालिक अध्यक्ष उपाध्यक्ष की कुर्सी चली गयी थी।

      उसके बाद नए अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए जिला पदाधिकारी के द्वारा 12 मार्च की तिथि निर्धारित की गयी थी। आखिर विक्षुब्ध खेमे के सदस्यों के द्वारा अपने समर्थित प्रतिनिधि को अध्यक्ष बनाने में सफल रहे।

      इस खेमे के द्वारा राजनीतिक जोड़-तोड़ से बचने के लिए लगभग दो महीने तक सदस्यों को जिले से बाहर अज्ञात स्थल पर रखा गया था। सभी सदस्य अचानक मतदान समय हरदेव भवन में सामूहिक रूप से पहुंचे।

      इस दौरान धन-बल-छल की राजनीति में माहिर पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष पिंकी कुमारी के खेवनहार उनके पति प्रेम कुमार ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के खास करीबी होने के बाबजूद अपनी हर रणनीति में विफल रहे।

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