अन्य
    Monday, April 15, 2024
    अन्य

       राजगीर अजातशत्रु किला के उत्खनन में मिले मौर्य-गुप्तकाल से प्राचीन पुरावशेष

      राजगीर (नालंदा दर्पण)। प्राचीन मगध सम्राट अजातशत्रु किला के उत्खनन से मौर्य काल शुंग कुषाण काल और गुप्त काल के पहले की प्रमाणिकता मिलने लगे हैं। इससे उत्खनन कार्य में लगे पुरातत्व कर्मियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

      यहाँ अब तक की खुदाई में लैंप स्टैंड, पैक खाने रखने के मिट्टी के ढक्कन युक्त बर्तन, हैंडल पॉल, टोटीदार मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के कमंडल, घुंघरू, हाथी दांत के लॉकेट, श्रृंगार की वस्तुएं आदि मिले हैं।

      भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ संजय कुमार मंजुल और निदेशक डॉ अरविन मंजुल द्वारा उत्खनन कार्यों का शनिवार को बारीकी से निरीक्षण किया गया।

      निरीक्षण के दौरान अधीक्षण (उत्खनन) सुजीत नयन द्वारा उन्हें यहां मिल रहे पुरावशेषों के बारे में विस्तार से बताया गया। अतिरिक्त महानिदेशक ने निरीक्षण के दौरान बताया कि राजगीर के अजातशत्रु किला में पुराने काल के अवशेष मिल रहे हैं। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। उत्खनन करना उनकी अभिलाषा थी।

      उन्होंने कहा राजगीर ऐसी जगह है जो नवीन और प्राक इतिहास को जोड़ता है। इसके गर्भ में कई काल खंड का इतिहास छिपा है। ऐतिहासिक साक्ष्यों को समझे बिना इतिहास को नहीं समझा जा सकता है। मगध साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को जानने के लिए यह उत्खनन किया जा रहा है।

      उन्होंने कहा कि किला के उत्खनन अनेकों रहस्य उभर कर सामने आएंगे। उससे इसकी प्राचीनता और कालखंड का निर्धारण किया जायेगा।

      डॉ मंजुल ने कहा कि राजगीर संस्कृति और सभ्यता की आदि भूमि है। यहां की संस्कृति और सभ्यता जमींदोज हो चुकी है। उसे देश और दुनिया के सामने लाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्खनन किया जा रहा है। राजगीर के इतिहास को सामने लाने से पर्यटन के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। उत्खनन वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। इसकी प्रॉपर रिकॉर्डिंग हो रही है।

      उन्होंने कहा कि यह उत्खनन बहुत महत्वपूर्ण है। साइंटिफिक टेस्टिंग के बाद अवशेषों के बारे में सही ढंग से बताया जा सकेगा।

      अधीक्षण पुरातत्वविद् सुजीत नयन ने बताया कि अजातशत्रु किला के उत्खनन के दौरान चौकाने वाले अनेकों पुरावशेष मिलने लगे हैं। अद्भुत कला युक्त मृदभांड मिले हैं। गुप्तकाल के कम्पोजिट टॉयलेट। कम्पलेक्स मिला है। यह मगध के संस्कृति व परंपरा की निशानी है।

      उन्होंने बताया कि शौचालय बुद्ध काल में भी था। वह वैशाली में उत्खनन के दौरान मिला है। उसके पहले हड़प्पा में इस तरह के अवशेष मिले हैं। उन्होंने बताया कि हजारों साल पुरानी व्यवस्था मुगल में ध्वस्त हो गया था। 300 सदी के पहले और मौर्य काल के पहले की प्रमाणिकता नहीं मिले हैं। लेकिन मौर्य काल के पहले के अवशेष राजगीर में मिले हैं। प्रथम सदी के अवशेष शुंग कुशान काल के अवशेष मिले हैं।

      नालंदा के सभी स्कूलों के बच्चों को ताजा अंडा और फल देने का आदेश

      किसान कॉलेज के प्रोफेसर संग अभद्र व्यवहार के लिए माफी मांगे मंत्री श्रवण कुमार : छोटे मुखिया

      बरगद के पेड़ से झूलता मिला डेंटल कॉलेज की महिला सफाईकर्मी की लाश

      प्रेम प्रसंग में पड़ी महिला की हत्या कर बरगद की डाली से टांग दिया

      मंत्री श्रवण कुमार की मानसिक हालत बिगड़ी, चंदा कर ईलाज कराएगी राजद

      संबंधित खबरें
      error: Content is protected !!