अन्य
    Monday, June 24, 2024
    अन्य

       जानें आखिर जापानी भिक्षु फुजी गुरु ने विश्व शांति स्तूप के लिए राजगीर को ही क्यों चुना 

      नालंदा दर्पण डेस्क /मुकेश भारतीय। दुनिया भर के प्रसिद्ध स्थानों में एक राजगीर विश्व शांति स्तूप बिहार राज्य के राजगीर नगर में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह स्तूप बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है और विश्व शांति के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

      इस विश्व शांति स्तूप का निर्माण 1969 में जापानी भिक्षु निचिडत्सु फुजी बौद्ध संघ द्वारा किया गया था, जो विश्व शांति और बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित थे। फुजी गुरु निचिरेन के अनुयायी थे, जिन्होंने अपने जीवन को अहिंसा और शांति के आदर्शों के प्रचार में समर्पित किया। इसका उद्देश्य विश्व शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देना है।

      इस विश्व शांति स्तूप की भव्यता और शांति पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह स्तूप पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और यहां से पूरे राजगीर नगर का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। स्तूप तक पहुंचने के लिए एक रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जो यात्रियों को अद्भुत अनुभव प्रदान करती है।

      इस स्तूप के चारों ओर के वातावरण में शांति और सौहार्द की अनुभूति होती है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल इसकी वास्तुकला की प्रशंसा करते हैं, बल्कि इसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी समझते हैं। स्तूप के चारों ओर विभिन्न बौद्ध मठ और मंदिर भी स्थित हैं, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।

      राजगीर विश्व शांति स्तूप न केवल बौद्ध अनुयायियों के लिए बल्कि सामान्य पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक स्थल है। इसकी स्थापत्य कला, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण इसे एक अद्वितीय स्थल बनाते हैं।

      राजगीर विश्व शांति स्तूप, जिसे विश्व शांति के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त है, एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। इस स्तूप का निर्माण 1969 में जापानी बौद्ध भिक्षु निचिडत्सु फुजी के नेतृत्व में हुआ था, जो विश्व शांति और बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित थे। फुजी गुरु निचिरेन के अनुयायी थे, जिन्होंने अपने जीवन को अहिंसा और शांति के आदर्शों के प्रचार में समर्पित किया।

      राजगीर विश्व शांति स्तूप का निर्माण एक विशेष सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति के दौरान हुआ था। यह वह समय था जब भारत में बौद्ध धर्म का पुनर्जागरण हो रहा था और विश्व में शांति की आवश्यकता अधिक महसूस की जा रही थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर शांति और अहिंसा के संदेश को फैलाने की आवश्यकता महसूस की गई थी। इस संदर्भ में फुजी और उनके शिष्यों ने राजगीर में इस स्तूप के निर्माण का संकल्प लिया।

      स्तूप का निर्माण एक कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। पहले राजगीर की पहाड़ियों में एक उपयुक्त स्थल का चयन किया गया। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया। जिसमें जापानी और भारतीय कारीगरों ने मिलकर अपने कौशल का प्रदर्शन किया।

      इस स्तूप के निर्माण में विशेष ध्यान दिया गया कि यह संरचना न केवल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना हो, बल्कि बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक संदेश को भी स्पष्ट रूप से व्यक्त करे।

      इस ऐतिहासिक स्तूप की स्थापना के साथ राजगीर ने वैश्विक स्तर पर शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां आने वाले भक्त और पर्यटक न केवल इस स्थापत्य कला की सुंदरता का आनंद लेते हैं, बल्कि इसके माध्यम से शांति और मानवता के संदेश को भी ग्रहण करते हैं। आज राजगीर विश्व शांति स्तूप न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी बौद्ध धर्म और शांति के आदर्शों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

      इस विश्व शांति स्तूप का निर्माण कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों के साथ किया गया था। जिनका मुख्य लक्ष्य शांति, सहिष्णुता और विश्व बंधुत्व को बढ़ावा देना था। इस स्तूप का निर्माण भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भी किया गया था। यह स्तूप विश्व भर में शांति और सद्भावना के संदेश को फैलाने का प्रतीक है।

      इस विश्व शांति स्तूप का उद्देश्य मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित करना और विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और देशों के लोगों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। इस स्तूप के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि शांति और सहिष्णुता के बिना किसी भी समाज का स्थायी विकास संभव नहीं है।

      इस स्तूप के निर्माण के पीछे का विचार था कि यह विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एक मंच पर लाए, जहां वे अपने विचारों और अनुभवों को साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।

      इस स्तूप के निर्माण का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य है हिंसा, युद्ध और संघर्षों के खिलाफ आवाज उठाना और अहिंसा के मार्ग को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना। शांति स्तूप का निर्माण इस विश्वास के साथ किया गया है कि शांति, प्रेम और सहिष्णुता के माध्यम से ही विश्व में स्थिरता और समृद्धि लाई जा सकती है। यह स्तूप लोगों को यह सिखाने का प्रयास करता है कि शांति केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और संतुलन से प्राप्त की जा सकती है।

      सबसे बड़ी बात कि राजगीर विश्व शांति स्तूप का उद्देश्य केवल शांति और सहिष्णुता का संदेश फैलाना ही नहीं है, बल्कि यह एक स्थान भी है, जहां लोग ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपने मन को शांति प्रदान कर सकते हैं।

      नालंदा पुरातत्व संग्रहालय: जहां देखें जाते हैं दुनिया के सबसे अधिक पुरावशेष

      राजगीर में बनेगा आधुनिक तकनीक से लैस भव्य संग्रहालय

      1.65 करोड़ खर्च से बजबजाती नाली बना राजगीर सरस्वती नदी कुंड

      अतंर्राष्ट्रीय पर्यटन नगर राजगीर की बड़ी मुसीबत बने फुटपाथी दुकानदार

      राजगीर अंचल कार्यालय में कमाई का जरिया बना परिमार्जन, जान बूझकर होता है छेड़छाड़

      LEAVE A REPLY

      Please enter your comment!
      Please enter your name here

      This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

      संबंधित खबरें
      error: Content is protected !!
      राजगीर वेणुवन की झुरमुट में मुस्कुराते भगवान बुद्ध राजगीर बिंबिसार जेल, जहां से रखी गई मगध पाटलिपुत्र की नींव राजगीर गृद्धकूट पर्वत : बौद्ध धर्म के महान ध्यान केंद्रों में एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल राजगीर का पांडु पोखर एक मनोरम ऐतिहासिक धरोहर