बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बिहारशरीफ बस स्टैंड (रामचन्द्रपुर) के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा हो चुका है। इस आधुनिक बस स्टैंड का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान भव्य समारोह में किया था। लेकिन उद्घाटन के 40 दिन बीत जाने के बाद भी बस स्टैंड को संबंधित विभाग को हैंडओवर नहीं किया जा सका है। इस देरी के चलते यात्रियों को शौचालय, रैन बसेरा और कैफेटेरिया जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
नए बस स्टैंड में कई आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। पुराने रैन बसेरे को तोड़कर नया रैन बसेरा बनाया गया है, जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर टिकट काउंटर की व्यवस्था है। इसके अलावा रात्री विश्राम के लिए 50 बेड का रैन बसेरा और टॉप फ्लोर पर एक कम्यूनिटी हॉल भी तैयार किया गया है। महिलाओं, पुरुषों और दिव्यांगों के लिए डीलक्स शौचालय भी बनकर तैयार हैं। लेकिन इन पर ताले लटके हुए हैं। सभी दिशाओं में जाने वाली बसों के लिए अलग-अलग टिकट काउंटर भी बनाए गए हैं।
सड़क पर जाम की समस्या से निपटने के लिए ऑटो और टेम्पो के लिए अलग स्टैंड बनाया गया है। जहां एक साथ 70-80 ऑटो खड़े हो सकते हैं। बस स्टैंड के चारों ओर जलजमाव की पुरानी समस्या को दूर करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण भी किया गया है। पुराने बस डिपो को व्यवस्थित कर वहां कैफेटेरिया की सुविधा भी जोड़ी गई है। लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया में देरी के कारण ये सभी सुविधाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं।
बिहारशरीफ के नगर आयुक्त दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि हैंडओवर की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और बसों का परिचालन शुरू है। हालांकि शौचालय और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं बंदोबस्ती के बाद ही शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पहली बार टेंडर में इन सुविधाओं के संचालन के लिए कोई संवेदक सामने नहीं आया था। अब दोबारा संवेदकों को आमंत्रित किया जाएगा। अगर इस बार भी टेंडर सफल नहीं हुआ तो नगर निगम अपने स्तर पर इन सुविधाओं को संचालित करेगा।
हालांकि, हैंडओवर में देरी का असर साफ दिख रहा है। ऑटो और ई-रिक्शा अभी भी सड़क पर ही खड़े हो रहे हैं। जिससे जाम की समस्या बरकरार है। यात्रियों को जाम से जूझते हुए बस स्टैंड तक पहुंचना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बाद भी व्यवस्था में सुधार न होना निराशाजनक है।
नए बस स्टैंड के निर्माण से लोगों में उम्मीद जगी थी कि यात्रा करना आसान और सुविधाजनक होगा, लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया में देरी ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस स्थिति को सुधारकर यात्रियों को राहत दे पाता है।
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