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    Sunday, May 26, 2024
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      बिना चढ़ावा दिए यहाँ नहीं बनता है प्रमाण पत्र, बोले बीडीओ- कंप्लेन पर एक्शन डीएम को लेना है!

      “इस संबंध में जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार की शिकायतें मिली है। लेकिन कारवाई जिलाधिकारी की ओर से होनी है…

      बेन (नालंदा दर्पण)। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की जरूरत हर किसी को अक्सर पड़ती है। दोनों प्रमाण पत्रों को लेकर बेन प्रखंड कार्यालय में फर्जीवाड़ा से लेकर नजराने तक का खेल चल रहा है। जिसके कारण जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बिना नजराने के बनवा पाना मुश्किल है।

      हर जगह जरुरतमंदों को अधिकारी के कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। बात स रुपए में जारी होने वाले प्रमाण पत्र पर पांच सौ रुपये से लेकर दो से ढाई हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। वहीं इक्कीस दिनों में जारी होने वाले प्रमाण पत्र में लोगों को महीनों चक्कर लगाना पड़ रहा है।

      इसके पूर्व भी सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार द्वारा नजराने वसूलते हुए वीडियो वायरल किया गया था। लेकिन किसी प्रकार की कारवाई नहीं होने की वजह से नजराने वसूलने वाले सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार की मनमानी चरम पर है।

      ताजा मामला आज शुक्रवार की है। जहाँ सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार द्वारा जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए दो से ढाई हजार रुपए की मांग की जा रही है। नहीं देने पर टहला दिया जा रहा है।

      चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है:  सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बताया गया कि जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र में सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार द्वारा मोटी रकम की उगाही का काम बिचौलिए के माध्यम से किया जा रहा है।

      यह जानने के लिए शुक्रवार को करीब तीन बजे एक्सपर्ट मीडिया न्यूज के रिपोर्टर बेन प्रखंड कार्यालय पहुंच गए। जहाँ इलाके के धरनीधाम से आए अरविन्द प्रसाद नामक व्यक्ति से मुलाकात हुई।

      पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत है। जिसके लिए मैंने सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार के कार्यालय में दो सप्ताह पूर्व आवेदन दिया है। जब हम आज पता करने आए तो सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र लेने के लिए दो से ढाई हजार रुपए देने पड़ेंगे। तब जाकर बनेगा।

      इतना हीं नहीं सांख्यिकी पदाधिकारी के कार्यालय से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों को बनाने में एक गिरोह भी सक्रिय है। जिसके माध्यम से नजराने की वसूली कर सांख्यिकी पदाधिकारी तक पहुंचाया जाता है।

      लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर जिला पदाधिकारी कारवाई क्यों नहीं करते। इतना हीं नहीं कई लोगों ने तो इतना तक कहा कि बिना रिश्वत लिए काम नहीं किया जाता। चाहे जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र का मामला हो या दाखिल खारिज का। ऐसे अधिकारियों पर कारवाई होनी चाहिए। ताकि लोगों को परेशानी से राहत मिल सके।

      इस संबंध में जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि सांख्यिकी पदाधिकारी अरुण कुमार की शिकायतें मिली है। लेकिन कारवाई जिलाधिकारी की ओर से होनी है।

       

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