8 जून तक आग उगलेगा रोहिणी नक्षत्र, जानें क्या है नौतपा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बीते 25 मई से सूर्यदेव का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश हो गया है। इसके साथ हीं आसमान से आग बरस रहा है। आम लोगों का जीना दूभर हो गया है। हालांकि रोहिणी नक्षत्र का तपना यानी गर्म रहना मॉनसून के लिए शुभ माना जाता है।

जानकारों के मुताबिक रोहिणी नक्षत्र 25 मई को पूर्वाह्न 03:17 बजे से शुरू होकर 08 जून शनिवार को सुबह 01:16 बजे तक रहेगी।

नौतपा गर्मी के मौसम से जुड़ा एक शब्द: गर्मी के मौसम से जुड़ा एक शब्द है ‘नौतपा’। इसका शाब्दिक अर्थ होता है नौ दिनों की भीषण गर्मी। यह ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है।

नौतपा तब शुरू होता है, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जो आम तौर पर ज्योतिष गणना के अनुसार ज्येष्ठ मास (मई-जून के बीच) में होता है।

सूर्य रोहिणी नक्षत्र में लगभग 15 दिन तक रहता है, लेकिन प्रारंभ के नौ दिन सबसे अधिक गर्म होता है। इसी अवधि को नौतपा कहा जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र का स्वामी है और शीतलता का कारक ग्रह माना जाता है। लेकिन जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो वह चंद्रमा को प्रभावित करता है, जिससे पथ्वी को चंद्रमा की शीतलता कम मिल पाती है।

इस कारण नौतपा के दौरान पृथ्वी पर अत्यधिक गर्मी पड़ती है। नौतपा के दौरान अगर बारिश हो जाए तो माना जाता है कि पूरे वर्ष भर अच्छी बारिश होगी।

इस दौरान क्या खाएं और क्या नहीं खाएं: मई-जून के महीने में सूर्य पृथ्वी के करीब होता है। इसके कारण धरती पर तापमान बढ़ जाता है।

इसके अलावा इन महीनों में दिन लंबे और रातें छोटी होती है। इससे सूर्य की रोशनी अधिक समय तक धरती पर पड़ती है। जिससे तापमान में और वृद्धि होती है।

नौतपा के समय में पानी, दही, दूध, नारियल पानी और अन्य ठंडी चीजों का सेवन करने के साथ इनका दान भी करना चाहिए। इस दौरान महिलाओं को अपने हाथों और पैरों में मेहंदी लगानी चाहिए, क्योंकि मेंहदी की तासीर ठंडी होती है।

इस दौरान आवश्यकता के अनुसार शीतल पेय लेना चाहिए। तली, भुनी, मांस, मछली, अंडा आदि समेत मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। ताजा शुद्ध खाना खाना चाहिए।

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